292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ऽकर्मचारी क्षतिपूर्ति (संशोधन) विधेयक
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मेरा प्रस्ताव हैः
‘‘कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 में और संशोधन करने वाले विधेयक
पर विचार किया जाए।’’
यह एक साधारण सा विधेयक है और इसका उद्देश्य 300 रुपए तक के वेतन पाने वाले कर्मचारियों के साथ मौजूदा परिस्थितियों में होने वाले अन्याय को दूर करना है। जैसाकि माननीय सदस्य अवगत होंगे, कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम में दी गई ‘‘कर्मचारी’’ की परिभाषा के अनुसार क्षतिपूर्ति उन्हीं कर्मचारियों के लिए की जाती है जो 300 रुपए तक वेतन पाते हैं। युद्ध के पूर्व 300 रुपए तक के वेतनभोगी कर्मचारियों को इस अधिनियम से लाभ मिलता था। युद्ध भत्ता और दूसरे लाभों जैसे मंहगाई भत्ता, बोनस सदव्यवहार वेतन और अन्य भुगतानों के शुरू किए जाने के फलस्वरूप हुआ यह कि जिन कर्मचारियों को क्षतिपूर्ति मिलती थी वे उससे वंचित हो गए क्योंकि उनका वेतन 300 रुपए से अधिक हो गया। इसका कारण है कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम में दी गई परिभाषा के अनुसार ये सारे अतिरिक्त भुगतान क्षतिपूर्ति की गणना में ‘‘वेतन’’ समझे जाते हैं। परिणाम यह हुआ कि पहले जिन कर्मचारियों को क्षतिपूर्ति होती थी अब वह नहीं होती। इस विधेयक में कहा गया है कि कर्मचारी के संरक्षण के लिए उसके वेतन की मासिक अधिकतम सीमा 300 रुपए के बजाए 400 रुपए कर दी जाए। इसलिए विधेयक में दो प्रावधान हैं, एक है कर्मचारी की परिभाषा बदलना जिससे कि वेतन सीमा 300 रुपए से बढ़ाकर 400 रुपए हो जाए और दूसरा है अधिनियम की अनुसूची- IV में संशोधन करना जिसमें कर्मचारी की मृत्यु, स्थायी और पूर्ण अपंगता तथा अस्थायी अपंगता की दशा में क्षतिपूर्ति का निर्धारण है।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 1, संख्या 12, 8 फरवरी, 1946, पृष्ठ 714