कर्मचारी क्षतिपूर्ति (संशोधन) विधेयक
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श्रीमन्, जैसा कि मैंने कहा, यह विधेयक एक साधारण सा विधान है। यह उसका अनुसरण मात्र है जो वास्तव में ग्रेट ब्रिटेन में किया गया है। वहां भी कर्मचारियों के संरक्षण के लिए मूलतः जो मुआवजा उन्हें मिलता था उनके वेतन की सीमा 350 पौंड से बढ़ाकर 425 पौड कर दी गई है। विधेयक साधारण ही नहीं, बल्कि एक विवादरहित व्यवस्था है। इस विधेयक के प्रावधानों पर प्रांतों से परामर्श कर लिया गया है और वे सर्वसम्मति से सहमत हो गई हैं कि विधेयक के संशोधनों को स्वीकार कर लिया जाए। यह प्रस्ताव स्थायी श्रम समिति के सामने भी रखा गया था और वहां भी समिति के सभी सदस्यों से इसका सर्वसम्मत अनुमोदन हो गया। मैं नहीं सोचता कि विधेयक के प्रावधानों पर मैं बहुत ज्यादा बोलूं। अब मैं इसे प्रस्तुत करता हूं।
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ऽअध्यक्ष महोदयः प्रश्न यह हैः
‘‘कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।
खंड 2 और 3 विधेयक में जोड़े गए।
खंड 1 विधेयक में जोड़ा गया।
शीर्षक और प्रस्तावना विधेयक में जोड़े गए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः
‘‘कि विधेयक पारित किया जाए।’’
अध्यक्ष महोदयः प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः
‘‘विधेयक पारित किया जाए।’’
ऽऽअध्यक्ष महोदयः क्या माननीय सदस्य को कुछ कहना है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जैसा कि मैंने कहा, यह विधेयक कर्मचारियों के एक वर्ग के साथ अन्याय को दूर करने के आशय से लाया गया है। इस विधेयक में इससे अधिक कुछ नहीं है। इस समय मैं इतना ही कहना चाहूता हूं कि मुझे उन
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 1, संख्या 2, 8 फरवरी, 1946, पृष्ठ 716
ऽऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 1, संख्या 12, 8 फरवरी, 1946, पृष्ठ 716
ऽऽऽ वही पृष्ठ 716