55. भारतीय खान (संशोधन) विधेयक - Page 320

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भारतीय खान (संशोधन) विधेयक

ऽमाननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः

‘‘कि भारतीय खान अधिनियम, 1923 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’

यह एक बहुत सरल विधेयक है।

(इस समय अध्यक्ष ने आसन खाली किया और उनके स्थान पर उपाध्यक्ष महोदय (सर मोहम्मद यामीन खां) पीठासीन हुए)

इस विधेयक का उद्देश्य खान मालिकों पर इस बात की अनिवार्यता लागू करना है कि वे खानों की ऊपरी सतह पर नहाने के स्नानागार बनाएं जिनमें शावर तथा लाकर-रूम का प्रबंध हो और शौचालय भी हों। इसी प्रकार स्त्रियों के लिए भी अलग से ऐसी ही व्यवस्था इस विधेयक में की गई है। पुरुषों तथा स्त्रियों के लिए स्नानागारों और शौचालयों की संख्या पुरुष व स्त्री कामगारों की संख्या के अनुपात में होगी। मैं नहीं समझता कि ऊपरी सतह पर स्नानागार बनाने की आवश्यकता पर कोई विवाद हो सकता है। खदान कर्मियों के आत्म-सम्मान के लिए यह आवश्यक है और मेरे विचार में वांछनीय भी है कि वे अपने घर साफ-सुथरे होकर पहुंचे, और संभव हो तो साफ कपड़े भी पहन कर जाएं। इस विषय पर खान सलाहकार समिति में भी विचार किया गया था जिसकी नियुक्ति सरकार ने कोयला खान कल्याण कोष के संचालन हेतु की है। समिति ने सर्वसम्मति से यह स्वीकार किया कि ऊपरी सतह पर स्नानागार की खान मालिकों पर बाध्यता हो। इसी को लागू करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। सरकार को खान अधिनियम की धारा 30 के अंतर्गत नियम बनाने के जो अधिकार प्राप्त हैं उनमें इस विधेयक द्वारा उसे ऊपरी सतह पर स्नानागार बनाए जाने के नियम बनाने का भी अधिकार दिया जा रहा है। विधेयक का यही उद्देश्य है।

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 1, संख्या 13, 8 फरवरी, 1946, पृष्ठ 716