296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधेयक के दूसरे खंड में इसके सिवाय कुछ नहीं है कि सरकार को कोयला
खान अधिनियम की सामान्य प्रक्रिया से छूट दी गई है जिसका उल्लेख धारा 31 में है। अधिनियम की धारा 31 में कहा गया है कि लागू करने से पहले नियमों को प्रकाशित किया जाए। हम उस नियम से छूट चाहते हैं इसलिए विधेयक में प्रावधान किया गया है कि उस प्रावधान से सरकार को छूट दी जाए जो धारा 31 में है। ऐसी छूट हम इसलिए चाहते हैं कि यह दायित्व न केवल लागू किया जाए बल्कि इस पर तुरंत अमल हो_ हम विलंब से बचना चाहते हैं। दरअसल मैं सदन का बताना चाहता हूं कि सरकार सभी खानों में ऊपरी सतह पर स्नानागार तुरंत बनाने को इतनी उत्सुक है कि उसने स्वयं ही प्रावधान कर दिया है कि यदि खदान मालिक बारह महीने के भीतर स्नानागार बनवा देते हैं तो उन्हें पूंजी लागत का दस प्रतिशत भाग सरकार की ओर से दिया जाएगा। इसी कारण हम नहीं चाहते कि धारा 31 इस काम में आड़े आए। यह विधेयक इतना आवश्यक, इतना साधारण और इतना विवादहीन है कि सदन इसे बिना विलंब किए स्वीकार कर लेगा। श्रीमन्, मैं अपना प्रस्ताव करता हूं।
उपाध्यक्ष महोदयः प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः
‘‘कि भारतीय खान अधिनियम, 1923 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः हम इसमें शीघ्रता चाहते हैं इसी कारण हम इस प्रोत्साहन की पेशकश कर रहे हैं कि यदि खान मालिक निर्धारित तिथि से बाहर महीने के भीतर ये स्नानागार बना देते हैं तो उन्हेंं यह रियायत मिलेगी, अन्यथा उन्हें पूरी लागत स्वयं वहन करके स्नानागार बनने होंगे।
पंडित गोविंद मालवीयः क्या यह उद्देश्य इस अपेक्षा से पूरा नहीं हो जाएगा कि खान मालिकों से कहा जाए कि वे ‘‘बारह महीने तक स्नानागार अनिवार्यतः तैयार कर लें.............
ऽमाननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं नहीं समझता कि मेरे माननीय मित्र श्री सिद्दीकी, जो इस समय सदन में नहीं हैं, शावर वाले स्नानागार से इतने परेशान होंगे। परंतु मैं सदन को बताना चाहता हूं कि स्नानागार में शावर हों या न हों, यह विशिष्टता सरकार की ओर से नहीं रखी गई है और न ही यह उसकी नई खोज है। जैसा कि मैंने कहा, एक सलाहकार समिति है जिसमें खानकर्मियों, खान-मालिकों
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 1, संख्या 13, 8 फरवरी, 1946, पृष्ठ 719-20