55. भारतीय खान (संशोधन) विधेयक - Page 322

भारतीय खान (संशोधन) विधेयक

297

तथा बंगाल और बिहार सरकार के प्रतिनिधि हैं और यह समिति सरकार को खानकर्मी कल्याण कोष के संचालन पर सलाह देती है। स्नानागार कैसे हों यह प्रश्न समिति के सामने रखा गया और मैं सदन को बताना चाहता हूं कि इसमे केवल मजदूर संघों के प्रतिनिधि ही नहीं हैं, बल्कि महिला और पुरुष कामगारों के प्रतिनिधि भी हैं। इनमें एक प्रतिनिधि खनिकों का है, एक प्रतिनिधि खनिक महिलाओं का है और उनकी सहमति से ही सरकार ने शावर वाले स्नानागार बनाए जाने का फैसला किया है।

जहां तक मैं समझ सकता हूं, कोयला खनिक को डुबकी लगाकर नहाने या नल के नीचे नहाने की अपेक्षा शावर में नहाने से अधिक स्वच्छता प्राप्त होगी। मुझे आगे कहना है कि भारत सरकार ने शावर वाले स्नानागारों का फैसला मैसर्स टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की डिगबोई कोयला खदान के अनुभवों के परिणामस्वरूप लिया है। वहां काफी समय से शावर या फव्वारा स्नानागार बने हैं। हमें बहुत संतोष है कि मजदूर फव्वारों का अच्छा इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। जहां तक साबुन का प्रश्न है, मैं सदन को आश्वासन दे सकता हूं कि कुछ विनियमों के अधीन हम भी प्रत्येक खनिक को साबुन उपलब्ध कराएंगे और मैं समझता हूं कि इस विषय में सदन को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

मुझे आशा है कि इससे सदस्य संतुष्ट होंगे। एक माननीय सदस्य ने कहा कि यह तो मात्र घोषणा है और इसमें दंड की कोई व्यवस्था नहीं है। यदि वह सदस्य धारा 39 का उल्लेख कर रहे हैं, तो वह पाएंगे कि एक सामान्य दंडात्मक खंड है जिसके अनुसार सजा दी जा सकती है।

प्रो. एन. जी. रंगाः महिलाओं के विषय में एक छोटी सी कठिनाई है। वे पानी से ही अपने बाल गीले नहीं करना चाहेंगी, उन्हें तेल या कुछ और चाहिए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः उन्हें टोपियां दी जा सकती है।

उपाध्यक्ष महोदयः प्रश्न हैः

‘‘कि भारतीय खान अधिनियम, 1923 में और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

खंड 2 और 3 विधेयक में जोड़े गए।

शीर्षक और प्रस्तावना विधेयक में जोड़ी गई।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः

‘‘कि विधेयक पारित किया जाए।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।