56. कारखाना (संशोधन) विधेयक - Page 326

कारखाना (संशोधन) विधेयक

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उत्पादन घटेगा, और यह जोर देकर कहा गया है। विशेष कपड़ा मिल वाले यह बात करते है। उनका कहना है कि उनके दृष्टिकोण से और देश के दृष्टिकोण से यह असामयिक कदम है। देश में कपड़े की बहुत कमी है। दरअसल इस समय कपड़े का अकाल है और वे कहते हैं कि इन परिस्थितियों में यदि कुछ आवश्यक है तो यह कि मिलों और खासतौर पर कपड़ा मिलों को काम के घंटों में अधिक रियायत मिलनी चाहिए जिससे कि कपड़े के उत्पादन की कमी पूरी की जा सके। काम के घंटों में कमी के उत्पादन पर प्रभाव को जानने के लिए खासतौर से कपड़ा मिलों में श्रम विभाग ने जांच कराई और मेरे पास बड़े रोचक आंकड़े हैं। आंकड़े तो बहुत से हैं, परंतु मैं उनसे सदन को उबाना नहीं चाहता। किन्तु मैं कपास के प्रयोग, करघों, तकुओं आदि की संख्या में वृद्धि का जिक्र करूंगा जिससे कि सदन अनुमान लगा सके। मैं 1934 के आंकड़ों को लेता हूं जिस साल काम के घंटों में परिवर्तन किया गया था और 60 से घटा कर 54 कर दिया गया था। 1934 में स्थिति यह थी। उस समय 352 कपड़ा मिलें थीं और कुल 9613174 तकुए, 194388 करघे तथा 384938 श्रमिक थे। इस दौरान 2703940 कपास की गांठों का प्रयोग हुआ। अगले साल 1935 में जब कानून के प्रावधान लागू हुए तो मिलों की संख्या बढ़कर 365 हो गई। तकुए 9685175 हो गए और करघों की संख्या बढ़कर 198867 हो गई। कर्मचारी भी 4,14,884 हो गए। कुल गांठे 3,123,418 प्रयोग में आई। आखिरी सात जिसके आंकड़े उपलब्ध हैं, 1938 है। इस वर्ष मिलों की संख्या 380 हो गई और तकुओं की संख्या भी बढ़कर 1020275 हो गई।

श्री श्रीप्रकाश ः क्या माननीय सदस्य उनकी संख्या लाख में बताएंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः ये यहां मिलियन में दिए गए हैं। जिन शब्दों का मैं प्रयोग कर रहा हूं सदन के दूसरे पक्ष के सदस्य उनसे पूरी तरह अवगत हैं। जितना सदस्य महोदय दर्शा रहे हैं वह उतने अनभिज्ञ नहीं हैं।

करघों की संख्या 200,286 थी, मजदूर 437,690 लगाए गए और 3,662,648 गांठें इस्तेमाल हुई। इसलिए मेरा निवेदन है कि यदि पिछले अनुभवों को भविष्य की संभावनाओं में देखा जाए तो मुझे विश्वास है कि ऐसी आशंकाएं निराधार हैं। फिर भी, भारत सरकार यह मानती है कि कपड़े का अकाल है। यदि अकाल भी नहीं तो मौजूदा हालत में अभाव है, इसलिए कुछ व्यवस्था करना जरूरी है जिससे कि मौका पड़े तो मिलों और अन्य प्रतिष्ठानों को जिनमें ज्यादा समय तक काम की जरूरत पड़े तो उन्हें यह छूट हो। तदनुसार, विधेयक में एक खंड जोड़ दिया गया है, जो खंड 5 है, और उससे धारा 44 संशोधित होती है। इस खंड की शब्दावली से पता चलेगा