8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
होगा और जो राज्य व्यक्तिगत रूप से प्रतिनिधि नहीं भेज पाएंगे उनका प्रतिनिधित्व चेम्बर आफ प्रिंसेज (युवराज सदन) करेगा।
कर्मचारियों और नियोजकों के मुख्य संगठनों का भी प्रतिनिधित्व होगा और सरकार को ऐसे कर्मचारियों और नियोजकों के प्रतिनिधि नामनिर्दिष्ट करने की छूट होगी, जिनका उसकी राय में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं हुआ। खुले सम्मेलन के मामले में, यह सुनिश्चित करना संभव नहीं होगा कि कर्मचारियों और नियोजकों के प्रतिनिधि सरकारी प्रतिनिधियों के बराबर हों।
स्थायी सलाहकार समिति
स्थायी सलाहकार समिति का गठन अधिक दृढ़ होगा और जैसा कि आप इस संकल्प के पाठ को जो आपके समक्ष रखा जाएगा, पढ़कर देखेंगे, इसमें प्रतिनिधित्व का बंटवारा निम्नलिखित रूप में होगा -
- भारत सरकार के प्रतिनिधि, 2. प्रांतों के प्रतिनिधि, 3. राज्यों के प्रतिनिधि,
- नियोजकों के प्रतिनिधि, 5. कर्मचारियों के प्रतिनिधि - केंद्र सरकार का श्रम प्रतिनिधि इसका अध्यक्ष होगा।
स्थायी सलाहकार समिति के गठन की बाबत हमने जहां तक हो सका बहुत बारीकी से अंतर्राष्ट ्र ीय श्रम कार्यालय के नियंत्रणधीन निकाय के गठन में निहित सिद्धांतों का अनुसरण किया है जो लीग आफ नेशन्स के तत्वाधान में स्थापित किया गया था। हमारे विचार में, तीन ऐसे सिद्धांत हैं जो इसके गठन के मूल तत्व हैं। प्रथम है सरकारी और गैर-सरकारी प्रतिनिधियों के बीच बराबरी। इसे अनुच्छेद 7 के खंड (1) में स्पष्ट किया गया है जिसके अनुसार 32 प्रतिनिधियों में से 16 सरकार के प्रतिनिधि होंगे और 16 कर्मचारियों और नियोजकों के प्रतिनिधि होंगे। इस सिद्धांत को प्रभावी करने के लिए हमने 10 सीटें सरकार को और 10 सीटें उद्योगों को दी हैं।
दूसरा सिद्धांत है नियोजकों और कर्मचारियों के बीच समानता। इस संबंध में भी उसी अनुच्छेद में उपबंध किया गया है जिसके अनुसार 16 गैर-सरकारी सीटों को नियोजकों और कर्मचारियों में बराबर बांट दिया गया है। हमने इसे मान्यता देते हुए उद्योगों के लिए आवंटित 10 सीटों को नियोजकों और कर्मचारियों के बीच बराबर-बराबर बांट दिया है।
तीसरा सिद्धांत
तीसरा सिद्धांत है आरक्षण के जरिए कतिपय वर्गों को प्रतिनिधित्व आश्वस्त करना। यह अनुच्छेद 7 में दिया गया है जिसके खंड (2) के अनुसार 16 सरकारी सीटों में से