57. पुनर्वास योजनाएं - Page 330

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ऽपुनर्वास योजनाएं

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः अध्यक्ष महोदय, यूरोपियन दल के नेता ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि वे नहीं समझते कि भारत सरकार की पुर्नस्थापना और पुनर्वास योजनाएं विस्थापकों की संख्या को देखते हुए ठीक गति से चल रही हैं। मान्यवर, इसी उद्देश्य से इस विषय में सदन को वांछित सूचना देने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। पुर्नस्थापना का कार्य दो भागों में विभाजित है - भूमि का पुर्नस्थापना और उद्योग में पुर्नस्थापना। भूमि पर पुर्नस्थापना का मामला राज्य सरकारों को सौंपा गया है। भूमि पर पुर्नस्थापना प्रांतों को सौंपे जाने का कारण सदन को पता है। संवैधानिक दृष्टि से भूमि प्रांतों का अधिकार-क्षेत्र है। चाहे इस बारे में कोई भी तर्क दिए जाएं कि पुर्नस्थापना का मामला एक ही सरकार अर्थात भारत सरकार के अधीन रहे, इससे अंतर नहीं पड़ता क्योंकि इन तर्कों से दूसरे तर्कों को निरस्त नहीं किया जा सकता जो इस तथ्य पर आधारित है कि भूमि प्रांतीय अधिकार-क्षेत्र का विषय है। इसलिए मेरी इस बात से सहमति है कि यह प्रश्न प्रांत सरकारों को सौंप दिया गया है। भारत सरकार के अधिकार-क्षेत्र में उद्योगों में की जाने वाली पुर्नस्थापना आती है। इसी विषय में मैं सदन को कुछ जानकारी देना चाहता हूं।

पुर्नस्थापना का कार्य पुर्नस्थापना और रोजगार महानिदेशक के कार्य क्षेत्र में है। विभाग या शाख को सात विभिन्न श्रेणियों में विभक्त किया गया है - (1) रोजगार विभाग, (2) तकनीकी प्रशिक्षण, (3) व्यावसायिक प्रशिक्षण, (4) अपंग सैनिक का पुनर्वास, (5) भूतपूर्व सैनिकों और अपंग सैनिकों को रोजगार देने के लिए प्रेरणा, (6) बाद की सेवाएं, (7) छंटनी किए गए या हटाए गए लोगों के आंकड़े।

भूतपूर्व सैनिकों और अपंग सैनिकों को फिर से नौकरी देने की प्रेरणा देने और साथ ही बाद की कार्रवाई सेवाओं, छंटनी के आंकड़े स्पष्टतः इतनी आवश्यक और स्वयं व्याख्यायित सेवाएं हैं कि उनके विषय में मैं सोचता हूं कि इन पर व्याख्या

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 3, संख्या 4, 5 मार्च, 1946, पृष्ठ 1898-1900