306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
करके मैं अपना समय नष्ट न करूं कि ये सेवाएं क्यों शुरू हुई की गई हैं और उनका आशय क्या है। इसलिए मैं इन विषयों को माननीय सदस्यों पर छोड़ता हूं कि वे भारत सरकार के श्रम विभाग द्वारा जारी की गई पुस्तक पढ़ लें। इसकी एक प्रति पुस्तकालय में है ओर यदि कोई माननीय सदस्य व्यक्तिगत उपयोग हेतु इसकी प्रति चाहता है तो मुझे उन्हें देने में बहुत प्रसन्नता होगी।
श्री एम. अनन्तशयनम अय्यंगरः शीर्षक क्या है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः ‘‘द डायरेक्टरेट जनरल आफ रिसेटेलमेंट एंड एम्प्लायमेंट।’’
बाबू राम नारायण सिंहः कृपया उसे परिचालित कर दें।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः पिछली बार जब श्रम सलाहकार समिति की बैठक हुई थी तो उसमें इसकी प्रतियां दी गई थीं। एकमात्र प्रश्न जिसकी व्याख्या जरूरी है वह है रोजगार दफतर, तकनीकी प्रशिक्षण, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास। मैं उनको क्रमानुसार लूंगा।
तकनीकी प्रशिक्षण में स्थिति यह है। तकनीकी प्रशिक्षण के लिए भारत सरकार के तकनीकी केंद्र हैं। इन केंद्रों में 14,000 सीटें युद्धोपरांत बेरोजगार लोगों के लिए आरक्षित हैं। इस प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष होगी। तकनीकी केंद्रों में 48 व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसकी विस्तृत सूची इस पुस्तिका के परिशिष्ट- VII के पृष्ठ 55 पर है। अब व्यावसायिक प्रशिक्षण को लें। इसका संबंध कृषि, दुग्ध उद्योग, कुटीर उद्योग, लिपिकीय और वाणिज्यिक व्यवसायों के प्रशिक्षण से है। यह योजना बन चुकी है और पुष्टि के लिए प्रांत सरकारों को भेजी गई है। प्रस्ताव यह है कि इन व्यावसायिक केंद्रों में 20,000 सीटें कृषि संबंधी व्यवसायों के लिए आरक्षित होंगी और 50,000 अन्य व्यवसायों के लिए होंगी।
अब पुनर्वास के प्रश्न पर आते हैं। इसमें युद्ध विभाग और श्रम विभाग दोनों का साझा है, और इसका कारण स्पष्ट है। एक सैनिक जो युद्ध में घायल हुआ है, उसके पुनर्वास का दायित्व दो चरणों में है। पहला चरण चिकित्सा का है जहां घाव भरना और अस्पताल से छुट्टी के बाद उसका पुनर्वास प्राथमिक महत्व का है। स्पष्ट है कि चूंकि सैनिक युद्ध विभाग की सेवा में था, इसलिए यह मामला युद्ध विभाग देखेगा। जब वह बाहर आएगा, अर्थात चिकित्सा के बाद पुनर्वास के प्रथम चरण की समाप्ति पर, तो वह श्रम विभाग के पास जाएगा और दूसरा काम श्रम विभाग देखेगा। सैनिकों के पुनर्वास के उद्देश्य से श्रम विभाग न दो प्रकार के केंद्र खोले हैंः एक तो प्राथमिक केंद्र कहलाते हैं, जिनमें 5000 लोगों के लिए स्थान है, और दूसरा विशेष