पुनर्वास योजनाएं
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प्रशिक्षण केंद्र जिसमें तीन हजार लोग होंगे। प्राथमिक केंद्र का उद्देश्य व्यक्तिगत रुचि का पता लगाना है। उसकी रुचि क्या है? उसे किस प्रशिक्षण केंद्र में भेजा जाए जहां उसे उसकी चोट विशेष का ध्यान रखकर अनुकूलतम व्यवसाय का प्रशिक्षण दिया जाए? पुनर्वास चाहने वाले सैनिकों के लिए कुल छह केंद्र खोलने की श्रम विभाग की योजना है। बंगलौर के पास जलादी में एक केन्द्र खोल दिया गया है और जल्दी ही पूना के पास औंध में दूसरा केंद्र खोलने का प्रस्ताव है।
अब मैं रोजगार दफतरों पर आता हूं जो दरअसल पुर्नस्थापना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है। श्रम विभाग इस निर्णय पर पहुंचा है कि ऐसे 71 रोजगार कार्यालय खोलना पर्याप्त होगा। उसने अब तक 38 ऐसे दफतर खोल दिए हैं और निर्णयानुसार जल्दी ही और दफतर खोले जाने की आशा है।
श्रीमन्, मैं जानता हूं कि इस सदन के सदस्यों और बाहर की जनता दोनों की ओर से कुछ आलोचना की जाती है - वह है यह प्रश्न कि रोजगार दफतर खोले जाने में उतनी तीव्रता से काम नहीं हो रहा है जितना होना चाहिए था। मैं इस आलोचना को समाप्त करना चाहता हूं, इसलिए सदन के सामने कुछ तथ्य प्रस्तुत करता हूं जिनसे स्पष्ट होगा कि श्रम विभाग शीघ्रता से क्यों रोजगार दफतर नहीं खोल पाता। एक बात जो याद रखनी है वह यह है कि जब तक किसी रोजगार दफतर को चलाने के लिए कोई प्रशिक्षित व्यक्ति नहीं मिलता है वह सफल नहीं हो सकता। यह ध्यान रखना होगा कि रोजगार दफतर चलाना विशेष प्रकार का कार्य है - अत्यधिक विशेष प्रकार का कार्य। कोई भी रोजगार दफतर पूरी तरह विफल हो जाएगा यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति के हाथ में सौंप दिया जाएगा जिसे कार्य का अनुभव नहीं है। इसलिए कोई रोजगार दफतर खोलने से पूर्व यह आवश्यक है कि ऐसे व्यक्ति को कुछ प्रशिक्षण दिया जाए जो रोजगार दफतर का प्रभारी हो। इसी कारण यह एक कठिनाई है कि रोजगार कार्यालय शीघ्र शुरू नहीं किए जा रहे हैं।
श्री पी.के. ग्रिफिथः प्रशिक्षण कहां दिया जाता है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं इस पर आ रहा हूं। इसलिए हमने दिल्ली में एक प्रशिक्षण केंद्र खोला है। श्री जोन्स के अधीन यह एक स्कूल जैसा है। उनकी सेवाएं हमें इंग्लैंड के श्रम विभाग ने दी हैं। वह इस प्रशिक्षण केंद्र को चलाते हैं। उसमें एक रोजगार दफतर के सभी पहुलओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रो. एन.जी. रंगाः एक समय में आप कितने लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः क्षमा चाहता हूं, मैं आपको सही संख्या नहीं बता सकता। इन पुस्तकों में यह संख्या है। मेरा ख्याल है एक बार में 35 को।