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ऽकर्मचारी कल्याण और सामाजिक सुरक्षा
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्य द्वारा दी गई सूचना के अनुसार इस कटौती प्रस्ताव का उद्देश्य स्पष्ट है। उनका आशय तीन विशिष्ट विषयों पर विचार करना है जिन पर कार्यकारी परिषद विफल रही है। उनके अनुसार वे हैं बेरोजगारी राहत, समुचित मंहगाई भत्ता और सामाजिक सुरक्षा लाभ। कटौती प्रस्ताव के बारे में पहले मुद्दे पर मैं कहना चाहूंगा कि यदि प्रस्ताव सामान्य होता है तो निस्संदेह इसका आधार भिन्न होता परंतु सदन देखेगा कि यह कटौती प्रस्ताव केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के विषय में है और मैं यह कहने का साहस कर सकता हूं कि इस कटौती प्रस्ताव में गंभीर गलती है। मैं नहीं जानता कि क्या कटौती प्रस्ताव देने वाले सदस्य की एकमात्र इच्छा यह है कि भारत सरकार तीन मामलों में जिनका उन्होंने जिक्र किया है कोई ऐसी नीति बनाए कि इस देश में विशेषाधिकार प्राप्त कर्मचारियों की एक श्रेणी बना दे, महज इसलिए कि वे केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं।
देश में केवल सरकार ही कर्मचारी नियुक्त नहीं करती। निजी मालिकों द्वारा भी काफी संख्या में कर्मचारी रखे जाते हैं। जैसा कि इस सदन में सभी सहमत होंगे, जब भारत सरकार श्रमिकों के लाभ के लिए कोई नीति बनाए तो वह इस ढंग से बनाई जाए कि एक श्रेणी विशेषाधिकार संपन्न और दूसरी श्रेणी विशेषाधिकार हीन न बन जाए। केवल भारत सरकार ही नियोजक नहीं है। वह एक राज्य है, वह एक सरकार है, और उसका दायित्व उन्हीं के प्रति नहीं है जो सीधे उसके कर्मचारी हैं। उसका दायित्व सभी श्रमिकों के बारे में सामान्य रूप से है। इसलिए उन सभी शिकायतों पर भारत सरकार को काम करना है जिनका प्रस्तावक ने प्रश्न उठाया है। भारत सरकार कर्तव्यबद्ध है कि वह इस ढंग से नीति बनाए जो श्रमिकों के लिए सामान्य रूप से लाभदायक हो, किसी वर्ग विशिष्ट के लिए ही नहीं।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 3, संख्या 7, 11 मार्च, 1946, पृष्ठ 2138-40