310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्रीमन्, मेरे माननीय मित्र ने कहा है कि भारत सरकार के अपने ही विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों को भिन्न-भिन्न वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। मैं स्वीकार करता हूं और मुझे इसका खेद है। परंतु मैं पूछना चाहता हूं कि इस श्रेणीकरण के लिए कौन जिम्मेदार है जो हमें वेतनों में - चाहे मूल वेतन हो या मंहगाई भत्ते या ग्रेच्युटी अथवा अन्य सुविधाएं हों -देखने के लिए मिलती है। मैं बेहिचक कह सकता हूं कि इसका पूरा दायित्व मजदूर नेताओं पर है। हमारे यहां एक रेलवेमेंस फेडरेशन है। कोई रेलवेमेंस फेडरेशन की नीति का अध्ययन करेगा तो मैं सोचता हूं वह मेरे साथ सहमत होगा कि उसने अपने हितों के संदर्भ में सदा संकीर्ण रुख अपनाया है। फेडरेशन का एक महत्वपूर्ण सेवा पर नियंत्रण है जिस पर समाज का जीवन निर्भर है इसलिए वह रेल विभाग को दबा लेता है और जोर डालता है कि रेल कर्मचारियों को कुछ विशेषाधिकार दिए जाएं। मैं कह सकता हूं कि वे विधानमंडलों के कुछ सदस्यों को भी अपने हितों के दायरे में लपेट लेते हैं। तब पक्षपात का भाव पैदा होता है, जो अन्य हितों की अनदेखी करके केवल रेल कर्मचारियों के लिए कुछ विशेषाधिकार ले लेता है। हालांकि यह खुल्लमखुल्ला नहीं कहा जाता, परंतु रेल कर्मचारी चाहते हैं कि अन्य केंद्रीय कर्मचारियों की अपेक्षा उनका पलड़ा भारी रहे। यदि एक विभाग के कर्मचारियों को रेल विभाग के समान कुछ दिया जाता है तो रेल विभाग के कर्मचारियों में तुरंत असंतोष पैदा हो जाता है क्योंकि वे कहने लगते हैं कि परंपरा और प्रथा के अनुसार उनके विशेषाधिकार की स्थिति बनी रहनी चाहिए और उनके वेतन में और आगे वृद्धि होनी चाहिए। यह चल रहा है, और श्रम विभाग के लिए कठिन स्थिति उत्पन्न हो गई है। मेरे माननीय मित्र ने कहा है कि श्रम विभाग न्यायनिर्णय बोर्ड की स्थापना नहीं कर रहा है जो इसे करनी चाहिए, परंतु किसी खास सेवा के लिए या किन्हीं खास मामलों में न्यायनिर्णय बोर्ड बनाने का क्या लाभ है जब कि हर मामला एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न है? नतीजा आपके सामने है - तदर्थ बोर्ड, तदर्थ रिपोर्ट, तदर्थ फैसले जिन पर तदर्थ कार्य हुआ। परिणाम रहा है अनवरत असमानता, अनवरत विविधता। इसलिए हमारे सामने फिलहाल जो स्थिति है वह गलत संगठनों की देन है। मैं इसे भारत के कर्मचारी वर्ग की देन कह सकता हूं और खासतौर पर भारत सरकार के कर्मचारी वर्ग की। मेरे विचार में सदन सहमत होगा कि सरकार ने जो हाल ही में वेतन आयोग गठित किया है वह सही दिशा में एक कदम है क्योंकि देश में वेतन ढांचे के पूरे प्रश्न पर और भारत सरकार के विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों के संबंध में तथा निजी क्षेत्र में वेतन के बारे में यह आयोग जांच करेगा। मुझे आशा है कि आयोग से हमें कुछ सिफारिशें प्राप्त होंगी जिनसे हम देश में वेतन प्रणाली में एकरूपता ला सकेंगे जिससे कि सभी का पता चलेगा कि जिस आधार पर वेतन