कर्मचारी कल्याण और सामाजिक सुरक्षा
नियत किए जाते हैं उसका सिद्धांत क्या है।
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दूसरी कठिनाई जो मैं समझता हूं, वह यह है कि भारत सरकार के अधिकांश कर्मचारी जो उन सेवाओं में तैनात हैं जिनसे राजस्व प्राप्त होता है, यह समझने लगे हैं कि उनके विभाग के राजस्व में सबसे पहला हिस्सा उन्हीं का है। रेलवे कर्मचारी यह समझते हैं कि चूंकि रेल विभाग को लाभ हो रहा है इसलिए उन्हें औरों से अधिक वेतन मिलना चाहिए। यदि डाक कर्मचारी ऐसा समझते हैं कि डाक विभाग को लाभ हुआ है तो वे भी दावा करते हैं कि उस विभाग के राजस्व से उनही बेहतरी, रहन-सहन के स्तर में सुधार किया जाए। श्रीमन्, जहां तक मेरा संबंध है, मुझे निश्चित रूप से यह स्वीकार नहीं और मैं सदा इसका विरोध करूंगा। भारत सरकार को जो राजस्व प्राप्त हाता है, चाहे वह कर लगाने से हो या व्यावसायिक उपक्रमों से हो, वह भारत सरकार का है। वह समाज के किसी खास वर्ग का नहीं है। वह भारत सरकार के निजी विभाग विशेष का नहीं है। वह भारत सरकार का राजस्व है, और पूरी जनता का उस पर दावा है। कर्मचारियों के किसी वर्ग द्वारा किए गए ऐसे दावे का मैं सदा प्रतिरोध करूंगा अर्थात इस बात का कि यदि उनका विभाग कोई लाभ कमाता है तो उस पर पहला हक उनका है। इससे अफरा-तफरी फैलेगी और मैं इसमें भागीदार नहीं बन सकता।
श्रीमन्, मेरे मित्र, कटौती प्रस्ताव के प्रस्तावक, ने बेरोजगारी का प्रश्न उठाया है। मैं उस विशिष्ट प्रश्न पर बोलना नहीं चाहता जो उन्होंने उठाया है, लेकिन मैं बेरोजगारी लाभ के सामान्य मुद्दे पर बोलूंगा और मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि यह एक अत्यंत भ्रामक तर्क है। बेरोजगारी का निराकरण रोजगार देना है, इस प्रकार की राहत देना नहीं। राहत देकर बेरोजगार से तभी छुटकारा मिल सकता है जब बेरोजगारी बहुत कम पैमाने पर हो, जब यह हाथी की पूंछ हो पूरा हाथ नहीं। जैसाकि सभी जानते हैं, इस देश में बेराजगारी 50-60 प्रतिशत है और हमें इनके लिए रोजगार चाहिए। क्या कोई यह कह सकता है कि 50-60 प्रतिशत जो बेरोजगार भारत में हैं इन राहतों से उन्हें काम मिल जाएगा? मुझे इस बात में जरा भी संदेह नहीं कि यदि यह जिम्मेदारी ले ली जाएगी तो देश बर्बाद हो जाएगा। मेरे मित्र इस बात पर सहमत होंगे कि राहत अधिक औद्योगिकीकरण के लिए दी जाए। तीव्र और व्यापक औद्योगिककीरण ही बेरोजगारी से छुटकारा दिला सकता है और जैसा कि यह सदन अवगत है, भारत सरकार ने अपनी योजना तैयार कर ली है और औद्योगिकीकरण के बारे में फैसले की घोषणा कर दी है। मैं इस विषय में और नहीं बोलूंगा। परंतु मैं सदन को बता दूं कि भारत सरकार ने वास्वत में देश के कर्मचारियों की आम बेहतरी और सामाजिक सुरक्षा के लिए क्या किया है।