59. मुसलमानों की स्थिति श्रम विभाग में बेहतर है - Page 340

मुसलमानों की स्थिति श्रम विभाग में बेहतर

ठेकों का प्रश्न उठाया.............

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श्री अहमद ई.एच. जफर (बंबई दक्षिणी डिवीजन-मुस्लिम देहात)ः मैंने उठाया था।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जी, हां, आपने। मैं भूल गया हूं कि माननीय सदस्य ने कितनी संख्या बताई थी।

श्री अहमद ई.एच. जफरः पांच करोड़।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः उनकी शिकायत थी कि लोदी रोड कार्य में मुसलमान ठेकेदारों का प्रतिशत कम था। मैं सही आंकड़े देता हूं।

श्री अहमद ई.एच. जफरः मैंने लोदी रोड कालोनी का खास जिक्र किया था, पर और भी बहुत से हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः माननीय सदस्य उस दिन लगभग अंत में बोले और मेरे लिए असंभव था कि आवश्यक आंकड़े एकत्र कर पाता, परंतु आंकड़े ये हैं।

डॉ. जियाऊद्दीन अहमद (संयुक्त प्रांत दक्षिणी डिवीजनः मुस्लिम देहात)ः इस समय आपको बोलने की आवश्यकता नहीं। आप कुछ समय बाद बोल सकते है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं माननीय सदस्य की इस सलाह के लिए कृतज्ञ हूं। परंतु मैंने इसे वांछनीय समझा कि मुस्लिम सदस्यों को अन्य कटौती प्रस्तावों के लिए पर्याप्त समय मिल जाए। यही कारण है कि मैं बीच में बोला, अन्यथा यह एक आम प्रस्ताव था। मैं बीच में बिल्कुल न बोलता और न जरूरत थी। यह तो कुछ सदस्यों की आशंका दूर करने के लिए था, जो श्रम विभाग के बारे में थीं।

श्री अहमद ई.एच. जफरः आपकी बहुत मेहरबानी।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः लोदी रोड के काम की स्थिति यह थी। मुख्य अभियंता द्वारा मुझे दी गई सूचना के अनुसार, मुसलमान ठेकेदारों को कुल मिलाकर 10.5 लाख रुपए के ठेके मिले। यह राशि उससे बहुत अधिक है जो मेरे माननीय मित्र ने बताई है।

श्री अहमद ई.एच. जफरः कितने में से?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः तीन करोड़ में से। मेरे माननीय मित्र याद करें और इस बात को भी ध्यान में रखें कि इन कामों का दायित्व एक मुस्लिम कार्यकारी अभियंता का था।

श्री अहमद ई.एच. जफरः उस पर सरकारी दबाव के बारे में क्या कहना है कि मुसलमानों को काम न दें?