59. मुसलमानों की स्थिति श्रम विभाग में बेहतर है - Page 344

मुसलमानों की स्थिति श्रम विभाग में बेहतर

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में प्रशिक्षण हों। हमने कुछ लोगों को प्रशिक्षित करने का फैसला किया है। स्पष्ट है कि ऐसे लोगों के प्रशिक्षण हेतु विश्वविद्यालयों के अनाड़ी लड़के नहीं रखे जा सकते। आपको ऐसे लोग लेने होंगे जिन्हें इस मामले में कुछ अनुभव हो। इसलिए हमने प्रांत सरकारों से पूछा कि क्या वे विदेश भेजने के लिए अपने बिजली विभाग के कर्मचारियों के नामों का सुझाव देंगे। यह चुनाव श्रम विभाग या भारत सरकार ने नही किया। यह चयन पूर्ण्तः प्रांत सरकारों के अधिकार क्षेत्र में था। कुल 10 व्यक्ति चुने गए। इनमें से एक मुसलमान था। उसे हैदराबाद रियायत ने चुना था और राज्यों ने मुस्लिमों को नहीं चुना, पता नहीं क्यों, शायद उनके बिजली विभाग में मुस्लिम नहीं थे।

खान अब्दुल गनी खां (पश्चिमोत्तर सीमाप्रांत - सामान्य)ः सीमांत प्रदेश में बिजली महकमें में लगभग 90 फीसदी मुसलमान हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुझे खेद है, परंतु आपके प्रांत ने किसी मुसलमान के नाम की सिफारिश नहीं की। आप सीमांत प्रांत की विधान सभा में यह प्रश्न उठाएं तो बेहतर है।

अब मैं तीन अन्य योजनाओं पर आ रहा हूं जिन्हें श्रम विभाग ने विदेशों में प्रशिक्षण के लिए प्रायोजित किया है। एक है बेविन प्रशिक्षण योजना। इसमें 787 लड़के भेजे गए। उनमें से 154 मुस्लिम थे अर्थात 19 प्रतिशत। फिर कल्याण कार्यों के लिए श्रम अधिकारियों के भी प्रशिक्षण का कार्यक्रम हैं इन अधिकारियों का चयन श्रम विभाग द्वारा नहीं किया जाता, उन्हें विभिन्न संबद्ध विभाग चुनते हैं। इसमें स्थिति यह है। कुल 23 को अब तक भेजा गया है। इन 23 में से 18 मुसलमान हैं जो 79 प्रतिशत अनुपात है। फिर, श्रीमन्, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को उच्च तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाने की एक अन्य योजना है। भारत सरकार ने निजी मालिकों को परिपत्र भेजा है कि यदि वे भारतीयों की तकनीकी क्षमता सुधारने के उद्देश्य से अपने किसी कर्मचारी को विदेश भेजना चाहें तो भारत सरकार का श्रम विभाग यथेष्ठ प्रयत्न करेगा कि उन्हें विदेश में प्रशिक्षित किया जाए। इस संबंध में अब तक 6 व्यक्ति भेजे गए हैं। दुर्भाग्य से, उनमें कोई मुसलमान नहीं था। परंतु इसमें निश्चित रूप से श्रम विभाग की कोई गलती नहीं है क्योंकि वह प्रशिक्षण के लिए उत्तरदायी नहीं है।

अब मैं एक और मुद्दे का जिक्र करूंगा। वह है परियोजना अधिकारियों और उपयोग अधिकारियों की नियुक्ति। ये नियुक्तियां भी संघीय लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाती हैं। दुर्भाग्य से जो स्थान भरे गए उनमें एक भी मुस्लिम नहीं था। इस संबंध में मैं प्रस्तावक का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि श्रम विभाग ने संघीय लोक सेवा आयोग से पत्र-व्यवहार किया। हमने पूछा कि जब हमें चयन सूची मिली तो भी उसमें एक भी मुस्लिम नहीं था। मैंने अपने विभाग से कहा कि संघीय लोक