60. भारतीय वित्त विधेयक - Page 347

322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ही है। मैं सोचता हूं ये कहना सही है कि वे किसी साधारण हिंदू के हाथ का ही नहीं बल्कि मैं जानता हूं दूसरे कुल के ब्राह्मण के हाथ का पानी भी नहीं पीएंगे।

श्री अनंत शयनम आयंगर (मद्रास सीडेड जिला और चित्तूरः गैर-मुस्लिम देहात)ः वह बराबर का न्याय करते हैं।

श्री श्रीप्रकाशः ब्राह्मण भी वेबकूफ हो सकते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं कहूं तो उनकी सोच उस चूहे के समान है जो अपनी शुचिता बचाए रखने के लिए एक बिल में घुसा रहता है, मानवों के संसर्ग से दूर। और मैं समझ सकता हूं कि वह इंसान जो ऐसी बातों में विश्वास रखता है वह वर्गवाद की बातें करने और देश के लोगों को राष्ट्रवाद का उपदेश देने से पूर्व अवश्य दो बार सोचेगा। मैं समझता हूं कि उन्हें जानना चाहिए कि वे एक संस्था से घनिष्टता से जुड़े हैं जिसे हम बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से जानते हैं। यदि यह वर्गवादी संस्था नहीं है, तो मैं जानना चाहूंगा कि वर्गवादी संस्था क्या होती है? श्रीमन्, मैं जानता हूं और मैं कह सकता हूं कि यह विश्वविद्यालय न केवल एक हिंदू विश्वविद्यालय है, यह ऐसा विश्वविद्यालय है जो एक समुदाय विशेष का हितसाधन करता है। मैं अपने माननीय क्षेत्र से पूछना चाहूंगा कि क्या यह सच नहीं है कि बनारस विश्वविद्यालय के कर्मचारी और शिक्षक वर्ग में मुश्किल से ही कोई और गैर-ब्राह्मण होगा।

एक माननीय सदस्यः है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं उनसे यह जानना चाहूंगा कि क्या बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद का यह 1916 का स्थायी संकल्प नहीं है कि कोई गैर-ब्राह्मण, चाहे वह हिंदू धर्म का कितना ही बड़ा विद्वान क्यों न हो, हिंदू धर्मशास्त्र पढ़ाने का अधिकारी नहीं है। मैं पूछना चाहूंगा कि क्या वे भूल गए हैं कि कुछ महीने पहले ही बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक कायस्थ छात्रा को इसलिए भूख हड़ताल करनी पड़ी कि उसे धर्मशास्त्र संकाय में प्रवेश नहीं दिया गया। यदि यह वर्गवाद नहीं है तो मैं पूछना चाहूंगा कि यह क्या है?

जब मैं कल बहस की कार्रवाई का वृत्तांत पढ़ रहा था तो मैंने देखा कि मेरे माननीय मित्र श्री आयंगर अनुसूचित जातियों के लिए एक अलग कालेज पर कुछ आश्चर्य जता रहे थे जो सदन के कार्यवाही वृत्तांत में मौजूद हैं। पता नहीं वे जानते हैं या नहीं कि हाल ही में सेलम में क्या हुआ। शायद वे भूल गए हैं।

श्री अनंत शयनम आयंगरः मुझे पता नहीं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः या वे राजनीति में इतने संलिप्त हैं कि वे नहीं जानते कि उनके अपने समुदाय के लोग क्या कर रहे हैं। मैं मद्रास के ‘‘हिंदू’’