60. भारतीय वित्त विधेयक - Page 349

324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुसूचित जातियों का संबंध है, उन्हें प्रवेश में प्राथमिकता मिलेगी, निःशुल्कता लागू रहेगी और छात्रावास में आरक्षण रहेगा। मैं सदन को बताना चाहता हूं कि इस कालेज की स्थापना की आवश्यकता क्यों पड़ी। माननीय सदस्य शायद अवगत नहीं है कि बंबई प्रांत में इस समय छात्रों की संख्या किस विकराल रूप में बढ़ रही है। विपक्ष में बैठे मेरे मित्र श्री गाडगिल जानते होंगे कि गत वर्ष बंबई विश्वविद्यालय ने उन्नीस नए कालेज खोले हैं। इससे पता चलता है कि प्रवेश पाना कितना कठिन हैं। इस बढ़ती संख्या से अनुसूचित जातियों के छात्रों को सबसे अधिक हानि हुई है। अनुसूचित जातियों के लड़के मैट्रिक पास करके विभिन्न कालेजों में दाखिला नहीं ले पाते। मैंने इसीलिए भारत सरकार को लिखा कि एक ऐसी संस्था होनी चाहिए जिसका पहला कार्य हो ऐसे लड़कों को प्राथमिकता देना। इस परियोजना में और कुछ नहीं है जिसे वर्गवादी या सांप्रदायिक कहा जा सके।

महोदय, एक और भी मामला है जो मेरे माननीय मित्र ने इसमें जोड़ दिया है और मेरी समझ में नहीं आता उसे क्यों जोड़ा गया। उन्होंने राजनीति घुसेड़ दी और कहा कि वह चुनावों से जुड़ा है। मैं तो हक्का-बक्का रह गया। पता नहीं वे क्या कहना चाहते हैं, परंतु मुझे विश्वास है कि वे ऐसा संकेत देना चाहते हैं कि भारत सरकार द्वारा मेरा नाम नहीं रखा जाना चाहिए था और कुछ इसी प्रकार की बात जो मैं नहीं जानता।

पंडित गोविंद मालवीय ः क्या आप नहीं जानते?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, चुनावों में जो कुछ हुआ उसे देखकर कहा जा सकता है कि अब मैं एक मुरझाया हुआ पौधा हूं। परंतु मैं अपने माननीय मित्रों को बताना चाहता हूं कि मैं जड़ से मरा हुआ पौधा नहीं हूं। बिल्कुल नहीं। मेरे माननीय मित्र चुनाव परिणामों की बात करते हैं। वे कहते हैं कि अनुसूचित जातियों की सीटें कांगे्रेस ने जीती हैं। हां जीती हैं। परंतु मैं अपने माननीय मित्र से पूछूंगा कि क्या उन्होंने यह जानने का कष्ट किया कि क्या तरीके अपनाकर कांग्रेस ने विजय प्राप्त की है?

प्रो. एन.पी. रंगाः हम तैयार हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जो तरीके अपनाए गए वे मैं अपने दोस्त को बताना चाहता हूं।

श्री अनंत शयनम आयंगरः वहीं पुराने आरोप?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः ये घिसे पिटे आरोप नहीं हैं। इसके प्रमाण हैं जिनकी जांच हो सकती है।