भारतीय वित्त विधेयक
प्रो. एन.पी. रंगाः संदेह के रास्ते मत चलिए।
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मेरे माननीय मित्र को पता होगा कि कई स्थानों पर अछूत मतदाताओं को मतदान केंद्र तक ही नहीं जाने दिया गया। मैं सतारा जिले का मामला बता रहा हूं जिसे इस सदन के अनेक सदस्य जानते होंगे क्योंकि उस जिले में एक समानांतर सरकार थी। 631 गांवों के अनुसूचित जातियों के मतदाताओं को गांवों के हिंदू ग्रामीण कचहरी में ले आए। उनसे पूछा गया कि क्या वे कांग्रेस उम्मीदवार को वोट देना चाहते हैं। जब उन्होंने इंकार कर दिया तो उनसे कहचरी मेंं बैठने के लिए कहा गया और उन पर पहरा बिठा दिया गया। उन्हें जाने नहीं दिया गया। मैं कई मामले बता सकता हूं।
पंडित गोविंद मालवीय ः हां, कृपया बताएं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः यहां तक कि कांग्रेस के खिलाफ खड़े हुए अनुसूचित जातीय उम्मीदवारों पर हमले किए गए। पास के ही आगरा के मामले को लें जो हाल ही का है। चुनाव के दिन अछूतों के पचास घर जला दिए गए। मतदान के लिए गए लोगों के 20 घर लूट लिए गए। कानपुर में सात लोगों की हत्या कर दी गई।
दीवान चमन लाल (पश्चिम बंगाल - गैर-मुस्लिम)ः किसने लूटा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः हिंदुओं ने। ये तरीके हैं जिनसे चुनाव जीते गए (व्यवधान)। मैं अपने माननीय मित्र को बताना चाहता हूं कि कांग्रेस ने सीटें जीती या परिगणित जाति संघ ने। इसका पैमाना अंतिम निर्वाचन नहीं है। ऐसा करना मूर्खता होगी। अंतिम चुनावों में जहां अनुसूचित जातियां अत्यधिक अल्पसंख्या में, 19 प्रतिशत हिंदूओं के मुकाबले 5 प्रतिशत हैं, वहां यह सोचना भी मूर्खता है कि अंतिम चुनाव भी कोई पैमाना था कि कौन किसका प्रतिनिधित्व करता है। वास्तविक पैमाना प्राथमिक चुनाव है। प्राथमिक चुनाव अनुसूचित जातियों के लिए पृथक मतदान है। प्राथमिक चुनावों में क्या हुआ? मैं विपक्ष के अपने मित्रों को प्राथमिक चुनावों के परिणामों का कुछ आभास करा दूं। पंजाब में तीन निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनमें प्राथमिक चुनाव हुए। बंबई में भी तीन निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां प्राथमिक चुनाव हुए।
श्री मोहन लाल सक्सेनाः कितने में से?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं समाप्त कर लूं।
अध्यक्ष महोदयः उन्हें आगे बोलने दें।