61. कलकत्ता में गवर्नमेंट आपफ इंडिया प्रेस के कर्मचारियों की हड़ताल - Page 356

कलकत्ता के गवर्नमेंट आफ इंडिया प्रेस के कर्मचारियों की हड़ताल

331

श्री सत्यप्रिय बनर्जीः जी, हां। लगभग 1200 कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः स्थिति यह है। कलक त्त् ा प्रेस के कर्मचारियों ने 13 मार्च को हड़ताल की एक सूचना दी थी। हड़ताल की ऐसी ही सूचनाएं विभिन्न स्थानों पर चल रही भारत सरकार की प्रेसों ने भी दी थी। कलक त्त् ा प्रेस के कर्मचारियों ने 13 मांगों की एक सूची भी भेजी थी। सरकार ने उन सब पर विचार किया और प्रेस कर्मचारियों को निम्नलिखित रियायतें दी - जिन दिनों प्रेस का राजपत्रित अवकाश होता है उन दिनों में काम करने का पूरक अवकाश, आंशिक कर्मचारियों की दक्षता अवरोध पार करने का पदोन्नति, पिछली तिथि से बढ़ा हुआ मंहगाई भ त्त् ा, पहली जनवरी 1945 के बजाय पहली जुलाई, 1944 से पेंशन की गणना में आधा मंहगाई भ त्त् ा शमिल, छोटे कर्मचारियों को औसत वेतन की आधी तक पेंशन, हड़ताल की पूरी अवधि को औसत वेतन सहित छुट्टी की स्वीकृति और उसे अनिश्चित दशा में समझ कर छुट्टी में जोड़ना, प्रेस कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों की विसंगतियों पर रिपोर्ट देने के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति, पारी पर काम करने वालों के काम के घंटों में कमी करके 48 के बजाए 44 करना और रात्रि में काम करने पर 44 के बजाए 38 करना_ आंशिक कर्मचारियों को 23 दिन का सवेतन अवकाश जैसा कि वेतनभोगियों को मिलता है।

अन्य मांगों के बारे में, जैसे वेतनमानों में संशोधन और रियायती दरों में वृद्धि के विषय में, सरकार ने सभी सरकारी प्रेस के कर्मचारियों को सूचित कर दिया है कि जब तक वेतन आयोग की रिपोर्ट आए तब तक वे लंबित रहेंगी और इसलिए फिलहाल सरकार इस स्थिति में नहीं है कि वह इन मांगों के विषय में कोई घोषणा करे।

मैं सदन को बता दूं कि जहां तक दिल्ली प्रेस के कर्मचारियों का संबंध है, ये रियायतें उन्होंने स्वीकार कर ली हैं और वे काम पर लौट आए हैं। मेरी समझ में नहीं आता कि ऐसा ही रवैया कलकत्ता प्रेस के कर्मचारियों ने क्यों नहीं अपनाया। मुझे कार्यालय से अभी पता चला है कि जिस मांग पर वे तत्काल बल दे रहे हे। वह है काम के घंटों में और कमी करके 44 के बजाए 40 घंटे करना। मैं तुरंत निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता, परंतु यह ऐसा विषय है जिस पर मैं विचार कर सकता हूं। मेरा विचार है कि इस कार्य स्थगन प्रस्ताव पर बहस से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकती।

श्री सत्यप्रिय बनर्जीः श्रीमन्, माननीय सदस्य अवगत होंगे कि उनके विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक ने 42 घंटों की सिफारिश की है परंतु इन्होंने अस्वीकार कर दिया है और 44 घंटों पर जोर दे रहे हैं। आखिरकार बंगाल सरकार के प्रेस कर्मचारी सप्ताह में 40 घंटे काम कर रहे हैं।