332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अध्यक्ष महोदयः यह जिरहबाजी है। फिलहाल में यह जानना चाह रहा था कि श्रम सदस्य ने अभी जो कुछ कहा है, उसकी दृष्टि से क्या यह पर्याप्त रूप से अविलंबनीय लोक महत्व का मामला है।
श्री सत्यप्रिय बनर्जीः श्रीमन्, बहुत से कर्मचारियों का प्रश्न है और इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों और उनके आश्रितों का जीवन दाव पर लगा हुआ है जो भूखमरी से जूझ रहे हैं। श्रीमन्, यदि यह पर्याप्त रूप से अविलंबनीय लोक महत्व का मामला नहीं है तो मैं नहीं जानता कि और क्या हो सकता है।
प्रो. एन.जी. रंगा (गुंटूर और नेल्लौरः गैर-मुस्लिम देहात)ः श्रीमन्, क्या मैं एक ‘निवेदन कर सकता हूं? यदि विभाग के लिए यह संभव हो तो किसी विशेष अधिकारी को भेजा जाए कि वह इन रियायतों का स्पष्टीकरण करे और उनसे विचार-विमर्श करे, संभव है वे हड़ताल जारी न रखें। आखिकार 1300 कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं, यह गंभीर मामला है, यहां तक कि सरकार के दृटिकोण से भी, क्योंकि उसका काम रुका पड़ा है।
माननीय गोविंद दास (मध्यप्रांत हिन्दी डिवीजनः गैर-मुस्लिम)ः माननीय सदस्य ने कहा है कि विभिन्न प्रेसों से हड़ताल के नोटिस मिले हैं। क्या कलकत्ता के साथ कहीं और भी हड़ताल है या हड़ताल की आशंका है?
अध्यक्ष महोदयः मैं नहीं समझता इसका मौजूदा मामले से कोई प्रसंग है। श्रम सदस्य ने जो कहा है उसे देखते हुए मैं नहीं समझता कि यह विषय कोई ऐसा है कि मैं कार्य स्थगन प्रस्ताव रखने की अनुमति दूं।