62. कारखाना (संशोधन) विधेयक - Page 358

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ऽकारखाना (संशोधन) विधेयक

सभापतिः अब सदन में कारखाना विधेयक पर विचार किया जाएगा।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं इस विषय पर अपने विचार रखना चाहता हूं। मेरे माननीय सह-सदस्य ने मुझे इस विषय पर बोलने के लिए कहा है और मैं इस बारे में बोलने के लिए सक्षम हूं क्योंकि इस सरकार के प्रत्येक सदस्य को पूरी सरकार की ओर से बोलने का अधिकार है।

दीवान चमन लाल (पश्चिम बंगालः गैर मुस्लिम)ः श्रीमन्, मैं इस प्रश्न के बारे में कुछ कहना चाहता हूं जब तक माननीय सदस्य मुझे बाद में भी बोलने के लिए सहमत न हों।

सभापतिः यदि वह सहमत भी हो जाते हैं तो मैं नहीं समझता कि मैं आदरणीय सदस्य को बहस का उत्तर देने के पश्चात नियमानुसार आज्ञा दे सकता हूं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः पहले ही बहुत कुछ कहा जा चुका है अतः अब अधिक कहने की आवश्यकता नहीं है।

सभापति महोदय, अब तक जो बहस की जा चुकी है, उसके अनुसार मेरे लिए बहुत कम कहने की गुंजाइश है क्योंकि एक पक्ष ने विधेयक के विरुद्ध जो कुछ भी कहा है और दूसरे पक्ष ने प्रभावकारी ढंग से उसका उत्तर दिया है, अतः इस समय ऐसी कोई अधिक आवश्यकता नहीं है कि मैं उन्हीं बातों को दोहराऊं जो पहले ही कही गई हैं। यदि मुझे कुछ कहना भी है तो मैं उस आलोचना का उत्तर देना चाहूंगा जो मेरे माननीय मित्र श्री वाडीलाल लालूभाई ने की है। मैंने ध्यानपूर्वक उनका भाषण सुना और मैं यह समझने में नितांत असमर्थ हूं कि उन्होंने इस विधेयक के बारे में क्या शिकायत की है। मैं भलीभांति अवगत हूं और प्रत्येक व्यक्ति इस बात से परिचित है आज कपड़े का भीषण अभाव है और यदि हम श्रमिकों के कार्य करने के घंटों से

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 2, संख्या 4, 4 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3526-27