कारखाना (संशोधन) विधेयक
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में प्रांतीय सरकारों के विषय में कठिनाइयां उत्पन्न करेंगे। मैं आशंका के विषय का पक्षधर नहीं हूं क्योंकि मेरा विश्वास है प्रांतीय सरकारें निस्संदेह रूप से उन श्रमिकों के तर्क सुनेंगी जिन्होंने छूट दिए जाने के विरुद्ध तर्क दिए हैं तथा वे आवश्यक रूप से सार्वजनिक आवश्यकताओं तथा सार्वजनिक हितों पर ध्यार देंगे और वे ऐसा करेंगे जिनकी परिस्थितिवश आवश्यकता है। अतः जहां तक उनके प्रथम विचार का संबंध है, मैं नहीं सोचता कि मैं उसकी पूर्ति कर सकूंगा क्योंकि कानून मुझे ऐसा नहीं करने देगा और दूसरे, मुझे यह नहीं लगता कि प्रांतीय सरकारों पर विश्वास क्यों नहीं किया जाए जो सामान्य रूप से जनता के हित में आवश्यक है।
उन्होंने एक अन्य प्रश्न यह उठाया कि क्या उद्योग और नागरिक पूर्ति विभाग इस कानून के लिए उत्तरदायित्व वहन करने के लिए तैयार है। मेरे विचार से उन्हें यह प्रश्न नहीं उठाना चाहिए था क्योंकि उन्होंने यदि इस बात पर विचार किया होता कि भारत सरकार किस प्रकार कार्य करती है तो उन्हें इस बात का पता हो जाता है कि कोई भी अधिनियम इस सदन के समक्ष तब तक नहीं लाया जा सकता जब तक इस बारे में कार्यकारी परिषद की पूर्व अनुमति न हो। इस कौंसिल में उद्योग तथा नागरिक पूर्ति के प्रभारी सदस्य को भी अपनी बात कहने का अधिकार है। मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि श्रम विभाग ने इस बात पर पूरा-पूरा विचार किया है जिसके विषय में उद्योग और नागरिक पूर्ति विभाग ने जोर दिया था और उसी के मतानुसार इस विधेयक में खंड 5 को सम्मिलित किया गया है। उसे इस बात की आंशका थी कि श्रमिकों के कार्य करने के घंटों के सीमित करने के बारे में सामान्य उपबंध आवश्यक और अनिवार्य हैं तथा उन्हें स्थगित नहीं किया जा सकता, परंतु फिर भी देश कतिपय अनुच्छेदों के साथ बंधा हुआ था और उन पर भी विचार किया जाना आवश्यक था तथा उसके विशेष आग्रह पर ही इस खंड को विधेयक में स्थान दिया गया है। मुझे आशा है कि मेरे माननीय सदस्य इस बात से संतुष्ट होंगे कि उद्योग एवं नागरिक पूर्ति विभाग पर इस विधेयक से जल्दबाजी में कोई बात नहीं थोपी जा रही है और इस विधेयक पर उसकी पूर्ण सहमति है। श्रीमन्, मैं इस विधेयक को प्रस्तुत करता हूं।
सभापति महोदयः प्रश्न यह हैः
‘‘कि कारखाना अधिनियम, 1934 को संशोधित करने वाले विधेयक पर, प्रवर समिति द्वारा प्रतिवेदित रूप में, विचार किया जाए।’’
सभापति महोदयः सर्वप्रथम, मैं खंड 2 पर चर्चा कराऊंगा और अंत में खंड 1 पर विचार किया जाएगा। सर्वश्री वाडीलाल लालूभाई और रामालिंगम चेट्टियार ने