336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
खंड 2 के बारे में संशोधन प्रस्तुत किए हैं।
श्री वाडीलाल लालूभाईः मुझे कुछ कहना है। डॉ. अम्बेडकर कहते हैं कि कानून में छूट की व्यवस्था नहीं है, परंतु जिस प्रकार से इस संशोधन का मसौदा तैयार किया गया है कि यह कानून के अंतर्गत आ जाएगा, मैं यह जानना चाहूंगा कि क्या मेरे द्वारा खंड 2 का जो संशोधन दिया गया है, वह कानून के अंतर्गत आता है।
सभापति महोदयः यह बात स्पष्ट नहीं है कि माननीय सदस्य का क्या मंतव्य है।
श्री वाडीलाल लालूभाईः माननीय सदस्य ने यह बताया कि कानून के अंतर्गत छूट की व्यवस्था नहीं की गई है। यदि वह खंड 2 का मेरा संशोधन पढ़ें, तो उन्हें विदित होगा कि इसमें कोई वैध अवरोध नहीं है। मैं यह जानना चाहूंगा कि क्या वैध अवरोध वह मेरे संशोधन का इसलिए विरोध कर रहे हैं कि इससे कानूनी बाधा आएगी अथवा कोई अन्य कारण हैं।
सभापति महोदयः मुझे विश्वास है कि माननीय सदस्य ने अपने भाषण में पर्याप्त रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मैं यह नहीं समझता कि इस प्रश्न पर कोई संदेह है। उन्होंने वैध अवरोध की बात एक तर्क के रूप में कही। उसके अतिरिक्त भी एक तर्क था कि उनकी राय में जो कुछ भी आवश्यक होगा, उसे सरकार सम्पन्न करेगी। क्या मेरा कथन सही है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जी हां, श्रीमन्।
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ऽसभापति महोदयः संशोधन प्रस्तुत हुआः
‘‘कि विधेयक के खंड 4 में शब्द 6 साढ़े दस घंटे अथवा यदि फैक्टरी मौसमी है तो साढ़े ग्यारह घंटे के स्थान पर ‘‘बारह घंटे’’ प्रतिस्थापित किए जाएं।’’
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमन् मैं इस संशोधन का विरोधा करता हूं। इसमें मुझे दो आपत्तियां नजर आती हैं। पहली आपत्ति सामान्य प्रकार की है। इस संशोधन के माननीय प्रस्तावक सदस्य की राय है कि यह किसी विशेष उद्योग के नियोक्ताओं ने अपने कारखनों में अपनी विशेष योजना के अनुसार अपने मजदूर काम पर लगाए हैं, तो कानून इस प्रकार बनाया जाना चाहिए कि वह कानून ऐसा हो जो उस समय प्रचलित व्यवस्था के अनुकूल हो। यह ऐसी स्थिति है जिसे मैं स्वीकार
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), 4 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3532