कारखाना (संशोधन) विधेयक
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करने के लिए तैयार नहीं हूं। अनेक नियोक्ता ऐसे कई साधन अपना सकते हैं जो नियोक्ताओं के हित में ही विशेष सहायक होते हैं और इस बारे में मेरा विचार है कि इस दायित्व को स्वीकार करना राज्य की ओर से एक भूल होगी कि वे उनके हित में विधान बनाने का प्रस्ताव करें। अतः विधान को ऐसा होना चिहए कि वह व्यवहार के अनुकूल हो और कानून को व्यवहार में परिवर्तन नहीं करना चाहिए यदि यह पाया जाए कि यह व्यवहार ठीक नहीं है। यह मेरा पहला तर्क है कि मैं यह संशोधन क्यों नहीं स्वीकार कर सकता।
दूसरा तर्क जो इस संशोधन के विरुद्ध उत्पन्न होता है यह है। यदि मैंने अपने माननीय सदस्य को ठीक समझा है, जिसे तरीके से नियोक्ता अपने मजदूरों की नियुक्ति करता है, वह कुछ इस प्रकार सरल शब्दों में अभिव्यक्त की जानी चाहिए_ वास्तव में उसके अंतर्गत मजदूरों के दो वर्ग होते हैं जिन्हें व्याख्या की दृष्टि से ‘क’ समूह और ‘ख’ समूह कहा जा सकता है और जिस तरीके से नियोक्ता उन मजदूरों को नियुक्त करता है वे इस प्रकार हैंः ‘क’ समूह वर्ग के मजदूर अपना काम प्रातः 8 बजे प्रारंभ करेंगे और अपराह्न 4 बजे समाप्त करेंगे। ‘ख’ समूह वर्ग के मजदूरों को 4 बजे शाम छुट्टी दे दी जाएगी और उसके बाद ‘क’ समूह वर्ग अपने काम पर लौट आएगा तथा 8 बजे शाम तक काम करता रहेगा। 8 बजे शाम को ‘क’ वर्ग समूह के मजदूरों को छुट्टी दे दी जाएगी और ‘ख’ वर्ग समूह के मजदूर काम करने लेगेंगे तथा वे मध्यरात्रि 12 बजे तक काम करेंगे। यदि मैंने माननीय सदस्य को ठीक समझा है तो यही तरीका है जिसके अनुसार कि नियोक्ता मजदूरों से काम लेते रहेंगे .............
श्री टी.ए. रामलिंगम चेट्टियारः बिल्कुल ठीक।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुझे लगता है कि यह व्यवस्था आधार रूप से विस्तार के सिद्धांत के विपरीत है। विस्तार का सिद्धांत क्या है? सिद्धांत यह है कि यथासंभव किसी भी मजदूर को कानून के अंतर्गत नियम अधिकतम कार्य के घंटों से अधिक अवधि के लिए फैक्टरी के अहाते में ठहरने की आवश्यकता नहीं है। हमने इस विधेयक में अधिकतम 9 घंटे प्रतिदिन काम करने की व्यवस्था की है। यदि संशोधन स्वीकृत हो जाए तो कामगार को अहाते में तीन घंटे अधिक ठहरना पड़ता जिसके बारे में मेरा निवेदन है कि यह विस्तार के सामान्य सिद्धांत के समरूप नहीं हैं। मेरा निवेदन है कि कारखाना कोई उद्यान नहीं है और वास्तव में कारखानों में आज वे सभी सुविधाएं नहीं हैं जो होनी चाहिए और यह अधिक वांछनीय है कि कामगार को यथाशीघ्र फैक्टरी छोड़ देने की अनुमति देनी चाहिए ताकि वह अपने घर