339
63
ऽअभ्रक खान श्रमिक कल्याण कोष विधेयक
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं प्रस्ताव करता हूंः-
‘‘कि अभ्रक खनन उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के कल्याण को प्रोन्नत करने
के लिए कार्यकलापों को वित्तपोषित करने हेतु एक कोष के निर्माण का प्रावधान
करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।’’
विधेयक का महत्वपूर्ण खंड 3 है जिसमें यह उपबंध किया गया है कि अभ्रक के निर्यात पर कर लगाया जाए ताकि एक ऐसा कोष बनाया जा सके जिसे अभ्रक
खनन उद्योग में कार्यरत मजदूरों के कल्याणार्थ प्रयुक्त किया जाए। कल्याण संबंधी कार्यकलापों के वे प्रकार इस विधेयक के खंड 2 में दिए गए हैं जो इस कोष से सम्पन्न किए जाएंगे। मेरे लिए यह आवश्यक नहीं है कि मैं इन खंड को दुहराऊं तथा सदन के समक्ष उनका वाचन करूं। इससे पूर्व कि मैं कुछ कहूं, मैं सदन को यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि भारत सरकार ने यह क्यों आवश्यक समझा है कि इस विधेयक के खंड 3 में वर्णित कोष का निर्माण किया जाए तथा मैं नहीं समझता कि इससे अच्छी बात कोई और हो सकती है। मैं अभ्रक खनन तथा अभ्रक निर्माण उद्योग के लिए श्रमिक समिति की रिपोर्ट के कुछ उद्धरण पढ़कर सुनाना चाहता हूं। यह रिपोर्ट प्रोफेसर अदारकर ने तैयार की है जो त्रिपक्षीय श्रमिक सम्मेलन द्वारा नियुक्त तथ्य खोज समिति के सदस्य थे। श्रीमन्, मैं आपकी अनुमति से इस रिपोर्ट के कुछ उद्धरण पढ़ना चाहता हूं। इस रिपोर्ट के पृष्ठ 27 पर प्रोफेसर अदारकर ने कहा हैः
‘‘हमने किसी भी खान में कोई मूत्रालय अथवा शौचालय की व्यवस्था नहीं
देखी। इस बारे में खान अधिनियम के उल्लंघन का संदर्भ पहले ही दिया जा
चुका है। यह आश्चर्य की बात है कि 500 फुट नीचे खान में काम करने वाले
श्रमिक उस समय क्या करते हैं जब उन्हें मल-मूत्र त्यागने की आवश्यकता
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 5, संख्या 7, 9 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3745-47