340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
होती है। अभ्रक खनन उद्योग में पीने के लिए शुद्ध जल के अभाव की पूर्ति की मांग है। डॉक्टरों ने हमें बताया कि मजदूरों को सप्लाई किए जाने वाले जल में हानिकारक खनिज मिले रहते हैं जिनके फलस्वरूप उन्हें दुष्पचन, आंत्र-रोग आदि हो जाते हैं जैसा कि मैंने पहले ही कहा है, कुछ बड़ी फर्में खानों में लॉरियों से जल ले जाती हैं, परंतु सामान्यतया महिलाओं को जल एकत्र करने के काम में लगाया जाता है और ये महिलाएं पांच से छह मील दूर गंदे तालाबों से जल एकत्र करती हैं। यह जल गंदे मिट्टी के घड़ों अथवा ड्रमों में भरा जाता है और उन्हें खदानों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रकार के जल की पूर्ति भी बहुत कम होती है। धोने के प्रयोजनों के लिए जल उपलब्ध नहीं कराया जाता। यह गंभीर समस्या है जिसकी ओर शीघ्र ही ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।’’
आवास व्यवस्था के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया हैः
‘‘ऐसे घरों’’ के लिए कोई भी विशेषण उपयुक्त नहीं दिखते जिनमें मजदूर रहते हैं। उनमें से अधिकांश घर अस्थायी है और उन्हें मजबूत बांस अथवा लकड़ी के खंभों के सहारे पत्तियों से बनाया गया है। ये घर दो प्रकार के होते हैं, हम उनका अलग-अलग वर्णन करेंगेः-
(i) पूर्णतया बांस और घास से निर्मित घर - हमने एक ऐसा विचित्र घर देखा, जिसे खान के मालिक ने मजदूरों के लिए बनाया था, जिसकी छत हरी पत्तियों की बनाई गई थी। सामान्य रूप से उसे देखने पर ऐसा लगता था मानों वह पशुओं का शेड हो। उस घर में शायद ही दरवाजों और खिड़कियों की आवश्यकता हो क्योंकि वह चारों ओर से खुला हुआ था। शेडनुमा घर में पति और पत्नी तथा उनके दो बच्चों के परिवार के साथ अन्य 10 मजदूर रहते थे। परिवार के लिए किसी प्रकार का कोई परदा नहीं था। उनके अलग-अलग चूल्हे बने हुए थे। फर्श पर घास बिछी हुई थी जिस पर रात के समय मजदूर सो जाते थे। इस प्रकार उपलब्ध किए गए आवास के लिए कोई किराया नहीं लिया जाता था। यह उल्लेखनीय है कि परिवार सहित मजदूर को घर में बसाने के बाद नियोक्ता अन्य 8 या 10 मजदूरों को उस घर में स्थान देता था। चूंकि मजदूर को कोई किराया नहीं देना पड़ता था अतः वह किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं कर पाता था।
(ii) अधिक अच्छे घर - इस प्रकार के घरों की संख्या बहुत कम है। ये घर सामान्यतया दरबान, खलासी तथा बढ़ई के लिए बनाए गए हैं। ये घर एक ही पंक्ति में एकल कमरों के रूप में बने हुए हैं और उनका किराया नहीं लिया