अभ्रक खान श्रमिक कल्याण कोष विधेयक
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बात से सहमत हैं कि प्रवर समिति को यह निदेश दिया जाए कि वह इस सत्र के समाप्त होने से पूर्व यह विधेयक सदन को लौटा देंगे ताकि इस विधेयक का दूसरा वाचन किया जाए तो ऐसी स्थिति में मैं यह संशोधन स्वीकार करने को तैयार हूं। मैं विधेयक प्रस्तुत करता हूं।
सभापति महोदयः प्रस्ताव हैः
‘‘अभ्रक खनन उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के कल्याण को प्रोन्नत करने वाले
कार्यकलापों को वित्तपोषित करने का प्रावधान करने वाले विधेयक पर विचार
किया जाए।’’
श्री अहमद ई.एच. जफर - (बंबई दक्षिण डिवीजनः मुस्लिम ग्रामीण क्षेत्र) ः श्रीमन्, मेरा प्रस्ताव हैः-
‘‘कि यह विधेयक एक प्रवर समिति को सौंप दिया जाए जिसके सदस्य माननीय सर अशोक राय, माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, कु. मनीबेन कारा, श्री एस.सी. जोशी, बाबू राम नारायण सिंह, सर आर. वेंकटसुब्बा रेड्डियार, श्री गौरी शंकर शरण सिंह, सर ए. करुणाकर मेनन, प्रोफेसर एन. जी. रंगा, श्री जोफरे डब्ल्यू. टाइसन, श्री मदनधारी सिंह, डॉ. सर जियाउद्दीन अहमद, खान बहादुर हाफिज, गजनफरुल्ला, श्री मुहम्मद नौमेन तथा प्रस्तावक हों और उसे निदेश दिया जाए कि वह अपनी रिपोर्ट 15 अप्रैल, 1946 तक प्रस्तुत कर दे और इस समिति की बैठक के गठन के लिए उपस्थित सदस्यों की आवश्यक संख्या पांच होगी।’’
सभापति महोदयः क्या 15 तारीख ठीक रहेगी?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जी नहीं, इसमें बहुत देर लग जाएगी।
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैंने यह नहीं कहा कि राजपूताना को बिल्कुल अलग रखा जाएगा। मैं एक अन्य समिति का गठन करूंगा।
दीवान चमन लालः मैंने अपने माननीय मित्र को यह कहते हुए नहीं सुना कि वह अलग समिति का गठन करेंगे। मैंने उन्हें यह कहते हुए सुना, ‘‘कुछ अन्य उपाय किया जाएगा।’’ मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि उन्होंने कहा है कि ‘‘एक अलग समिति का गठन किया जाएगा।’’ जहां तक इस विधेयक का संबंध है, इस विधेयक में राजपूताना को छोड़ दिया गया है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः ये कल्याणकारी योजनाएं इस कोष की सहायता से सम्पन्न की जाएंगी।