अभ्रक खान श्रमिक कल्याण कोष विधेयक
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यह आवश्यक समझा है कि कल्याण कार्यों के लिए एक अलग कोष होना चाहिए तथा कुछ प्रशासकीय उपायों के लिए ऐसा कोष होना चाहिए जो इस उद्योग के लिए आवश्यक समझा जाए। इस निर्णय का मुख्य कारण यह है कि कल्याण कार्यों के कोष का प्रशासन एक अलग एजेंसी द्वारा किया जाना चाहिए जबकि अन्य प्रयोजनों के लिए प्रशासन किसी अन्य एजेंसी द्वारा किया जाना चाहिए। इस प्रकार मेरे माननीय मित्र श्री टाइसन यह देखेंगे कि भारत सरकार का निर्णय श्री रियूबेन की रिपोर्ट से पूर्णतया मेल खाता है।
जैसाकि मेरे माननीय मित्र देखेंगे, अतिरिक्त उपकर के संबंध में प्रारंभिक अवस्था में बहुत कम उपकर निर्धारित किया गया है। रियूबन रिपोर्ट में मूल्यानुसार प्रस्तावित आंकड़ा 6 प्रतिशत है।
श्री ज्योफे डब्ल्यू. टाइसनः श्रम या सामान्य?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः सामान्य।
यह ऐसा मामला है जिसकी बाद में जांच करने की आवश्यकता है कि उपकर की अधिकतम सीमा क्या होनी चाहिए ताकि उपकर से ऐसा पर्याप्त राजस्व प्राप्त हो सके जो कल्याण और अन्य प्रयोजनों दोनों के लिए पर्याप्त होगी।
दीवान चमन लालः मेरे माननीय मित्र को कितने उपकर की आशा है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जरा रुकें, मैं इस बारे में बाद में बात करूंगा। जहां तक अधिक स्टॉक का प्रश्न है, मैं सदन को सूचित करूंगा कि भारत सरकार उस अभ्रक के अधिक स्टाक के निपटाने के प्रश्न पर काफी समय से महामहिम की सरकार से विचार-विमर्श कर रही है जो महामहिम सरकार तथा अमरीका में रोक लिया गया है। मुझे यह कहने में प्रसन्नता है कि अब हम ऐसे समझौते पर आ गए हैं कि अधिक स्टाक के निपटान द्वारा अभ्रक उद्योग को किसी प्रकार की कोई हानि नहीं होगी। यह विचार-विमर्श अब अंतिम चरण में आ गया है और कुछ ही दिनों में एक प्रेस नोट जारी कर दिया जाएगा जिसमें ऐसे समझौते के बारे में उद्योगकर्मियों तथा आम जनता को सूचित कर दिया जाएगा कि महामहिम सरकार और भारत सरकार के बीच समझौता हो गया है। मैं यह भी बताना चाहूंगा कि इस समझौते के लिए स्वयं अभ्रक उद्योग का सर्वाधिक समर्थन है।
इस विधेयक के बारे में मैं सदन को यह भी सूचित करूंगा कि इसको स्वयं उद्योग ने पूर्व अनुमति दी है। इस प्रश्न को सर्वप्रथम मैंने उस सम्मेलन में उठाया था जो 29 अप्रैल, 1944 को कोडरमा में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन की अध्यक्षता मैंने की थी और इसमें अभ्रक उद्योग के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। मुझे