63. अभ्रक खान श्रमिक कल्याण कोष विधेयक - Page 375

350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं करते। परंतु मुझे यह आशा है कि वह इस बात से सहमत होंगे कि देर आयद दुरुस्त आयद।

कोष के प्रशासन के प्रश्न पर विचार करते हुए मैं समझता हूं कि उन्होंने जो बात उठाई है उसका इस बात से संबंध है कि कोष के प्रशासन के कार्य को प्रांतीय सरकारों पर छोड़ देना चाहिए। मुझे यह कहने में खेद है कि मैं इस सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर सकता। यह विधान केंद्रीय विधान है, यह ऐसा विधान है कि इसके लिए केंद्रीय सरकार उत्तरदायी है। यह कोष केंद्रीय सरकार कानून द्वारा प्राप्त किया जाएगा। इसको प्राप्त करने का उद्देश्य किसी विशेष और विशिष्ट प्रयोजन के लिए है। इन परिस्थितियों से मुझे लगा कि भारत सरकार की ओर से यह संगत नहीं है कि इस समूची राशि को प्रांतीय सरकारों को आवंटित कर दिया जाए जहां यह राशि प्रांत के सामान्य राजस्व में मिला दी जाए और अपनी मर्जी के अनुसार खर्च कर दी जाए। मेरा विचार है कि इस कोष का उत्तरदायी केंद्रीय उत्तरदायित्व है क्योंकि यह कोष किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए है और चूंकि यह एक प्रकार का न्यास होगा जिसका प्रशासन भारत सकार करेगी इसलिए प्रत्येक दशा में वांछनीय है, वांछनीय ही नहीं अपितु आवश्यक है कि केंद्रीय सरकार प्रारंभ से लेकर अंत तक इस कोष के प्रशासन को अपने हाथ में रखे। जब बात ऐसी है तो मैं अपने माननीय मित्र को यह बताना चाहूंगा कि शायद उन्होंने इस व्यवस्था का अध्ययन नहीं किया है जिसके अनुसार कोयला खनन श्रमिक कल्याण कोष का प्रशासन किया जाता है। इसलिए मैं उनसे इसके बारे में कुछ विस्तार से कहना चाहूंगा क्योंकि कोयला खनन श्रमिक कोष का प्रशासन एक आदर्श होगा, यह केवल आदर्श ही नहीं अपितु एक नमूना होगा जिसके आधार पर इस कोष का प्रशासन चलाया जाएगा। जहां तक कोयला खनन श्रमिक कोष के प्रशासन का संबंध है, उसकी शक्ति उस आयुक्त में निहित है जो सामान्यतया एक प्रांतीय अधिकारी होता है और ऐसा अधिकारी होता है जिसे प्रांतीय सरकार तैनात करती है। यदि मैं माननीय सदस्य को यह बताऊं कि इस समय जो व्यक्ति कोयला खनन कल्याण कोष का प्रशासन चला रहा है वह वही अधिकारी है जिसे बिहार सरकार ने तैनात किया है। माननीय सदस्य को इस बात से आश्वस्त होना चाहिए कि जहां तक अभ्रक कोष के प्रशासन का मामला है, हम बिहार सरकार से कहेंगे कि वह अपने किसी अधिकारी को इस कार्य के लिए तैनात करे। जैसाकि मैंने कहा, और जैसाकि विधेयक में व्यवस्था की गई है, समिति का गठन ऐसा होना चाहिए कि इसमें बिहार और मद्रास के अभ्रक उद्योग के जो प्रतिनिधि हों वे ऐसे स्थानीय व्यक्ति होंगे जो स्थानीय परिस्थितियों से परिचित हों। इसके अलावा, कोयला