63. अभ्रक खान श्रमिक कल्याण कोष विधेयक - Page 376

अभ्रक खान श्रमिक कल्याण कोष विधेयक

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खनन कल्याण कोष के गठन के नियमों के अनुसार इस बात की व्यवस्था की गई है कि प्रांतीय सरकारें सलाहकार समिति के सदस्य होने के लिए अपने प्रतिनिधि भेजेंगी। इसी प्रकार की प्रक्रिया का अनुसरण अभ्रक सलाहकार समिति के संबंध में भी किया जाएगा। हम नियमों द्वारा इसकी व्यवस्था करेंगे। इन समितियों की प्रति तीन माह में बैठक होती है, इसके लिए कार्यसूची तैयार की जाती है और समिति की सलाह मांगी जाती है। इसके लिए उत्पादकों, मालिकों, कार्यकर्ताओं और प्रांतीय सरकारों से भी व्यक्ति लिए जाते हैं। सलाहकार समिति के समक्ष इसके लिए वार्षिक बजट भी प्रस्तुत किया जाता है। उनकी सलाह ली जाती है। उनकी सलाह के बाद अलग-अलग उन प्रयोजनों के लिए कोष व्यय किया जाता है जिनके लिए धन की व्यवस्था की गई है।

मेरा विश्वास है कि इस व्यवस्था के बाद मेरे मित्र श्री राम नारायण सिंह को यह विदित होगा कि केंद्र से किसी प्रकार की कोई निरंकुशलता नहीं होगी। पर्याप्त विकेंद्रीकरण है और उत्पादकों, कार्यकर्ताओं तथा प्रांतीय सरकार के बीच इस कोष के प्रशासन में पूरा सहयोग है। श्रीमन्, मैं यह नहीं सोचता कि अब कोई ऐसी बात रह गई है जिसे इस विधेयक पर भाषणों के दौरान उठाया गया हो और जिसका कि मैंने उत्तर न दिया हो। अंतः इस विषय में मुझे कुछ और नहीं कहना है।

सभापति महोदयः प्रश्न हैः

‘‘कि यह विधेयक एक प्रवर समिति को सौंप दिया जाए जिसके सदस्य माननीय सर अशोक राय, माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, कु. मनी बैन कारा, श्री एस. सी. जोशी, बाबू रामनारायण सिंह, सर आर. वैंकटसुब्बा रेड्डीयार, श्री गौरी शंकर शरण सिंह, सर ए. करुणाकर मेनन, प्रोफेसर एन.जी. रंगा, श्री जोफरे डब्ल्यू टाइसन, श्री मदनधारी सिंह, डॉ. सर जियाउद्दीन अहमद, खान बहादुर हाफिज, एम.गजनफरुल्ला, श्री मोहम्मद नौमेन और प्रस्तावक हों और उसे यह निर्देश दिया जाए कि वह अपनी रिपोर्ट 12 अप्रैल, 1946 तक प्रस्तुत कर दें और इस समिति की बैठक के गठन के लिए उपस्थित सदस्यों की आवश्यक संख्या पांच होगी।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।