352 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
64
ऽऔद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) विधेयक
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य)ः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूंः
‘‘कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियोक्ताओं से यह अपेक्षा करने वाले विधेयक
पर कि वे अपने अंतर्गत काम की शर्तों को औपचारिक रूप से परिभाषित करें
विचार किया जाए।’’
श्रीमन्, यह बहुत ही सरल विधेयक है और जहां तक मैं समझता हूं यह विवादहीन है। इस विधेयक का उद्देश्य यह है कि इसमें ऐसी शर्तें होनी चाहिए जिन्हें इस प्रयोजन के लिए नियुक्त सक्षम अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाए और इसमें ऐसा रजिस्टर तैयार किया जाना चाहिए जिसमें किसी विशेष प्रतिष्ठान की शर्तों का उल्लेख हो। इस विधेयक में रोजगार की शर्तों के महज पंजीकरण और उनकी विश्वसनीयता और औचित्य के निर्णय के बीच अंतर किया गया है। इस विधेयक में रोजगार की शर्तों के विश्वसनीयता और औचित्य के निर्णय के प्रश्न पर चर्चा नहीं की गई है। प्रत्येक नियोक्ता इस विधेयक के अंतर्गत इस बात के लिए स्वतंत्र है कि वह अपनी इच्छानसार रोजगार की शर्तें निश्चित करे। इस विधेयक के अनुसार इस बात की आवश्यकता है कि नियोक्ता अपने प्रतिष्ठान में कार्य पर लगाए गए कर्मियों पर लागू रोजगार की शर्तों के निर्धारण के पश्चात उन्हें उस अधिकारी को प्रस्तुत करेगा जिसे सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है और वह अधिकारी उन शर्तों का उल्लेख अपने रजिस्टर में करेगा तथा इस रजिस्टर से पता चलेगा कि वास्तव में शर्तें क्या निश्चित की गई थी। दूसरे शब्दों में, यदि मैं इसे अन्य प्रकार से अभिव्यक्त करूं, इस विधेयक में केवल यह प्रावधान होगा जो साक्ष्य का नियम कहलाता है। इस प्रकार यदि यह विधेयक पारित हो जाता है और यदि नियोक्ता और कामगार के बीच किन्हीं संबंधित
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 5, संख्या 9, 12 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3914