64. औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) विधेयक - Page 378

औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश विधेयक

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शर्तों के बारे में कोई विवाद उठता है तो इस साक्ष्य को कानून के अंतर्गत प्रलेखी साक्ष्य स्वीकार किया जाएगा। प्रमाणित करने वाला अधिकारी नियोक्ता को प्रमाणित प्रति देगा और मौखिक साक्ष्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि सदन इस विधेयक के खंड 12 को देखें तो पायेगा कि यह बिंदु पर्याप्त रूप से स्पष्ट कर दिया गया है। इस खंड में कहा गया हैः

‘‘किसी न्यायालय में कोई ऐसा मौखिक साक्ष्य स्वीकार नहीं किया जाएगा

जिसके प्रभाव से इस अधिनियम के अंतर्गत अंतिम रूप में प्रमाणित स्थायी आदेशों

में किसी प्रकार का अंतर आता हो या विरोध पैदा होता हो।’’

वास्तव में इस विधेयक का यही उद्देश्य है। जैसाकि मैंने कहा था, इसमें कोई भी नया नियम निहित नहीं है। इस प्रकार का अधिनियम पहले से ही बंबई प्रांत में विद्यमान है और इस विधेयक में उन सभी बातों का प्रस्ताव है कि उस अधिनियम के उपबंधों को भारत के अन्य प्रांतों में भी लागू किया जाए।

इस विधयेक में ऐसे अनेक खंड हैं जो केवल प्रक्रिया के मामलों से संबंधित हैं और जिनमें यह परिभाषित है कि प्रमाणित करने वाला अधिकारी इस मामले में किस प्रकार आगे बढ़ेगा जब उसे नियोक्ता से शर्तें और निबंधन की सामग्री प्राप्त होती है। उस अधिकारी के लिए यह आवश्यक होगा कि वह उस प्रतिष्ठान में नियुक्त कर्मचारियों को अधिसूचित करे और कोई भी प्रमाणपत्र देने से पूर्व उनकी बात सुने। यदि नियोक्ता को यह पता लगे कि उसने जो शर्तें प्रस्तावित की हैं, वे पूर्णतया इसके उपबंधों के अनुकूल हैं और प्रमाणित करने वाला अधिकारी उसे प्रमाण् ापत्र नहीं देता तो नियोक्ता को यह भी अधिकार होगा कि वह किसी भी अपीली अदालत में जा सके और इस प्रकार वह प्रमाणित करने वाले अधिकारी का निर्णय रद्द कराए।

मैं यह आवश्यक नहीं समझता कि मैं इस सदन का अधिक समय इस समय लूं जब हमारे पास बहुत ही कम समय है और इस विधेयक के अलग-अलग खंडों पर विचार-विमर्श कर सकूं। परंतु मैं यह कहना आवश्यक समझता हूं कि सरकार यह क्यों समझती है कि यह विधेयक न केवल आवश्यक है अपितु बड़ा तात्कालिक भी है। यह विधेयक एक अन्य कानून से अधिक समन्वित रूप से संबंधित है जिसके बारे में सरकार विचार कर रही है और जिसका संबंध स्वास्थ्य बीमा से है तथा जिसके बारे में सरकार अगले सत्र में विधेयक लाने का विचार करती है। स्वास्थ्य विधेयक में कर्मचारी को लाभों से संबंधित कुछ अधिकारों की व्यवस्था की गई हैः इसमें उन पर कुछ ऐसे दायित्व डाले गए हैं कि वे स्वास्थ्य बीमा निधि में योगदान करें। ये अधिकार और दायित्व परस्पर संबंधित हैं जैसाकि अलग-अलग प्रतिष्ठानों में कर्मचारी