64. औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) विधेयक - Page 379

354 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मजदूरी लेते हैं। अब उस योगदान के लिए विवाद उठ सकते हैं जो किसी कर्मचारी द्व ारा इस कोष में अदा किया जाना है। इस बात के भी विचार उठ सकते हैं कि किसी कर्मचारी की बीमा कोष के अधीन क्या लाभ उठाने का अधिकार है। सरकार यह आवश्यक समझती है कि कर्मचारियों की शर्तों को प्रमाणित किया जाना चाहिए तथा उन्हें एक रजिस्टर मेंं लिखा जाना चाहिए ताकि जब विवाद उठे, उस समय मजदूरी और उन अन्य शर्तों के संबंध में ऐसा अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सके जिससे कर्मचारी प्रतिबंधित हो। वास्तव में यह महसूस किया जाता है कि स्वास्थ्य बीमा कोष से आकलन उस समय तक अधिक कठिन होगा जब तक हमने औद्योगिक प्रतिष्ठानों के मजदूरों के रोजगार से संबंधित कतिपय प्रश्नों को मिथ्या-दोषारोपण, संदेह और विवाद से अलग न किया जाए।

इन शब्दों के साथ, मैं प्रस्ताव करता हूं कि इस विधेयक पर विचार किया जाए।

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ऽमाननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं यह नहीं समझता था कि यह विधेयक पारित कराया जाने वाला प्रस्ताव इस प्रकार की बहस को प्रेरित करेगा जो अभी हमने सुनी है। मैं यह कहे बिना नहीं रह सकता कि मुझे अपने मित्र माननीय डॉ. सर जियाउद्दीन अहमद के भाषण पर विशेष आश्चर्य हुआ है और मुझे इस बात की आशंका है कि उनका भाषण इस तथ्य के कारण हुआ कि शायद उन्होंने कुछ ऐसा कुछ खा लिया जो उनके दोपहर के भोजन में पाचन योग्य नहीं था क्योंकि हम वह जानते हैं कि डॉ. जियाउद्दीन अहमद श्रम-कानून बनाने के अनवरत समर्थक रहे हैं और कई बार उन्होंने इसी सदन में अधिक विस्तार और देरी किए बिना श्रम कानून बनाने की आवश्यकता के लिए मुझ पर जोर डाला है। आज उन्होंने विरोधी स्वर में अपना भाषण दिया है, परन्तु मैं यह देखकर प्रसन्न हूं कि टिप्पणियों का पूर्ण उत्तर मेरे मित्र श्री सिद्दकी ने दे दिया है और मेरा विचार है कि मेरे लिए यह संगत न होगा कि सदन में इस मामले को फिर उठाया जाए।

अब केवल एक बात रहती है जो उन्होंने उठाई है और मैं इसका उत्तर देना चाहूंगा। उन्होंने यह कहा कि उन्हें इस विधेयक के बारे में पर्याप्त नोटिस नहीं मिला था। इस संबंध में स्थिति यह है कि इस विधेयक से संबंधित कार्यसूची को शुक्रवार 6 तारीख को माननीय सदस्यों को परिचालित किया गया था। इसी कार्यसूची में यह विधेयक इस सभा के कार्यक्रम की पहली मद थी। यह केवल सभा के कार्यक्रम का ही अंग नहीं था, परंतु उसमें इस आशय की एक टिप्पणी भी निश्चित रूप से

ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केंद्रीय), खंड 5, संख्या 9, 12 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 3926