64. औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) विधेयक - Page 380

औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश विधेयक

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की गई थी कि शुक्रवार 12 अप्रैल, 1946 के दिन इस पर विचार किया जाएगा और यह सभा के कार्यक्रम की पहली मद होगी। मैं नहीं समझता कि क्या 6 दिन का नोटिस अपर्याप्त है।

जहां तक इस विधेयक का संबंध है, मुझे यह आशा थी कि मैं इसे 15 मिनट में ही पारित करा लूंगा, परंतु अब हमने इस संबंध में लगभग एक घंटे पांच मिनट का समय ले लिया है। अंत में, मैं यह नहीं समझता कि कोई भी व्यक्ति यह कैसे कह सकता है कि मैं इस कानून को सदन में शीघ्रता से पारित कराने का प्रयत्न कर रहा हूं।

मेरे मित्र श्री इन्सकिप्ट ने यह बात उठाई है कि इस मामले में नोटिस के लिए पर्याप्त समय नहीं था कि वे अपने मुवक्किलों से परामर्श कर सकें। मैं यह अवश्य कहूंगा कि उन्होंने इस विधेयक के पूर्व इतिहास को एकदम गलत समझा है अथवा वह इस विधेयक के पूर्व-इतिहास को भूल गए हैं। यह विधेयक वर्ष 1944 में स्थायी श्रम समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। इस संबंध में पूर्णतया एकमत थी और उसने यह सुझाव दिया कि यह विधेयक इतना आवश्यक और विवादहीन है कि सरकार इस विधेयक को एक अध्यादेश के रूप में भी पारित कर सकती है, जो हमने नहीं किया। इसके बाद यह मामला फिर भी भारतीय श्रम सम्मेलन में विचार-विमर्श के लिए उठा।

उन्होंने जो दूसरी बात उठाई है, उसके अनुसार यह विधेयक जो अब इस सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, उस रूप में नहीं है जैसाकि श्रम सम्मेलन के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। मैं उन्हें यह बताना चाहूंगा कि यह नितांत भ्रमपूर्ण विचार है। सरकार ने ऐस कोई भी परिवर्तन नहीं किए हैं जो इस विधेयक के प्रारूप में हों जैसाकि इस विधेयक को त्रिपक्षीय सम्मेलन के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

मेरे मित्र प्रोफेसर रंगा ने एक प्रश्न उठाया है कि यह विधेयक छोटे कारखानों पर किस प्रकार लागू किया जाएगा। मेरे मित्र श्री ग्विल्ट ने भी इस बात पर जोर दिया है और कहा है कि मैं इस बारे में स्पष्टीकरण दूं। यदि किसी ने भी खंड 1 के उपखंड (3) को पढ़ा है तो उसे किसी प्रकार की आशंका नहीं होनी चाहिए कि यह केवल ऐसे औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक ही सीमित है जहां 100 या इससे अधिक श्रमिक काम पर लगाए जाते हैं क्योंकि उस खंड में यह कहा गया है कि सरकार को यह शक्ति और प्राधिकार होगा कि वह इसे ‘‘ऐसे अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों के किसी वर्ग अथवा वर्गों पर लागू करे जिसे समय-समय पर सरकार उचित समझे और इसका उल्लेख सरकारी गजट में विज्ञप्ति द्वारा किया जाएगा तथा इस विज्ञप्ति में इस बात का स्पष्टीकरण किया जाएगा।’’ अतः सरकार ने अपने हाथों में ही यह