356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
शक्ति रखी है कि इस कानून को उन औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लागू किया जाए जहां 100 से कम लोग काम करते हैं। अतः ऐसी कोई भी आशंका कि यह विधेयक उन औद्योगिक प्रतिष्ठों पर मुख्यतया लागू होगा जहां 100 या इससे अधिक व्यक्ति काम पर लगाए जाते हैं और इसके फलस्वरूप अन्य प्रतिष्ठानों को छोड़ दिया जाएगा जहां श्रमिकों की संख्या कम हैं, एक ऐसी आशंका है जिसके बारे में मेरा निवेदन है कि यह पूर्णतया निराधार है।
दीवान चमन लालः क्या मैं एक मिनट के लिए हस्तक्षेप कर सकता हूं? पृष्ठ 2, खंड 2 (ग) (ii) में औद्योगिक प्रतिष्ठान की परिभाषा के अंतर्गत यह बताया गया है कि ‘‘कारखाना अधिनियम की धारा 2 के खंड (×ा) में परिभाषित कारखाने से अभिप्रेत है।’’ मैं समझता हूं कि कारखाने की वह परिभाषा कारखाना अधिनियम के अनुसार है। परंतु बीस व्यक्तियों के कारखाने को ‘‘औद्योगिक प्रतिष्ठान’’ की परिभाषा में नहीं समझा जाएगा जो यहां दी गई है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः परंतु सरकार ऐसे कारखाने पर भी इसे लागू कर सकती है जिसमें बीस व्यक्ति काम करते हों।
दीवान चमन लालः सरकार ऐसा कर सकती है, परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि सरकार को ऐसा करना चाहिए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः हम पहले उन कारखानों में उसे लागू कर रहे हैं जहां 100 व्यक्ति काम करते हैं।
श्री लेसिली ग्विल्टः इससे कम कर्मचारियों वाले कारखाने से आरंभ क्या नहीं करते है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः ऐसी कोई बाधा नहीं है कि सरकार इससे कम कर्मचारियों वाले कारखाने पर यह कानून लागू न कर सके।
दीवान चमन लालः यदि भारतीय कारखाना अधिनियम ऐसे प्रतिष्ठान पर लागू किया जा सकता है जहां केवल बीस व्यक्ति काम पर लगे हुए हैं तो यह विधेयक इसी प्रकार के औद्योगिक प्रतिष्ठान पर लागू क्यों नहीं होता?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जैसी स्थिति है, इस अधिनियम के अंतर्गत ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो इस विधेयक के दायित्व को उन कारखानों पर लागू करने पर सरकार को रोके जहां बीस व्यक्ति काम करते हैं। हमने यह उचित समझा कि कार्य प्रारंभ किया जाना चाहिए। इसके अलावा प्रशासकीय तंत्र शायद इतना विशाल होना चाहिए कि यह कानून प्रत्येक कारखाने पर लागू किया जाए। प्रमाणित करने वाले अधिकारियों की संख्या बहुत अधिक हो जाएगी और कोई भी प्रांतीय सरकार