362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जाना चाहिए जिसमें श्रमिकों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधि सम्मिलित किए जाएं। इस प्रश्न पर भी विचार-विमर्श किया गया कि क्या सभी वर्गों के नियोक्ताओं के लिए कानून द्वारा कल्याण योजनाओं को अनिवार्य बनाया जाए।
इस समिति द्वारा जिन अन्य मदों पर विचार-विमर्श किया गया वे हैं अनियमित कारखानों के लिए केंद्रीय विधान की वांछनीयता, व्यापार विवाद अधिनियम में संशोधन, उद्योगों में होने वाली बेरोजगारी की संभावित सीमा, हड़ताल अथवा तालाबंदी के दौरान रोजगार कार्यालयों की प्रवृत्ति तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा प्रस्तावित खनन श्रमिक अधिकार-पत्र।
केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों, भारतीय रियासतों, नियोक्ताओं तथा श्रमिकों के संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया। लाला कृपा नारायण, श्री शांति लाल मंगलदास, श्री भगवानदास सी. मेहता, माननीय श्री एच.डी.टोनेंड और रायबहादुर श्यामा नंदन सहाय नियोक्ताओं की ओर से प्रतिनिधि थे तथा सर्वश्री एन.एम.जोशी, एन.वी. फडके, वी.एस. कर्णिक, ए.के. मुखर्जी और आर.आर. भोले ने श्रमिकों का प्रतिनिधित्व किया।
ऽश्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा
रेगे समिति की रिपोर्टें
भारत सरकार द्वारा 12 फरवरी, 1944 को नियुक्त श्रमिक जांच समिति ने लगभग बीस लाख शब्दों की 35 रिपोर्टों में निहित श्रमिकों की दशा के सभी पक्षों के बारे में आंकड़े एकत्र किए। इस समिति के अध्यक्ष श्री डी.वी.रेगे, आई.सी.एस. और सदस्य श्री एस.आर. देशपांडे, डॉ. अहमद मुख्तार और प्रोफेसर बी.पी.आदरकर थे। श्रम सदस्य माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर द्वारा 9 अप्रैल को केंद्रीय विधान सभा के पटल पर इन रिपोर्टों में से 20 रिपोर्टें रखी गई।
चयन किए गए 38 उद्योगों पर समिति द्वारा आंकड़े एकत्र किए गए। ये उद्योग हैंः
खनन - कोयला, मेंगनीज, सोना, अभ्रक, कच्चा लोहा और नमक_
बागान - चाय, कॉफी तथा रबड़_
कारखाने - सूत, जूट रेशम, ऊन, खनिज तेल, डॉकयार्ड, इंजीनियरी, सीमेंट, माचिस, कागज, कालीन, बुनाई, नारियल, जटा, उत्पाद, चर्म शोधन तथा चमड़े के सामान का निर्माण, मिट्टी के पॉटरी, छपाई के प्रेस, कांच संबंधी रसायन और औषध
ऽ इंडियन इनफोर्मेशन, 15 अप्रैल, 1946, पृष्ठ 568