विविध
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निर्माण शालाएं, लाख, बीड़ी बनाना, अभ्रक की परतें करना, शक्कर, कपास, कपास ओटना, और गट्ठर बनाना तथा चावल मिलें_
परिवहन - ट्रामवे और बसें तथा अराजपत्रित रेलेवे कर्मचारी_ और अन्य प्रकार- पत्तन श्रमिक, नगरपालिका श्रमिक, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और रिक्शा चालक। यह आशा की जाती है कि भविष्य में सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए व्यवस्था करने और कानून बनाने की भावी योजना में इससे सहायता मिलेगी।
नमूने तैयार करने की विधि
यह महसूस किया गया कि श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं का संबंध क्षेत्रवार बिखराव की अपेक्षा उद्योगवार बिखराव से अधिक है_ अतः समिति ने नमूने के अनुसार चयन का तरीका अपनाया तथा भारत भर में उद्योगवार सर्वेक्षण किया। दो वर्षों की कार्यविधि में अध्यक्ष और सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से समस्त भारत का दौरा किया तथा श्रीनगर और त्रिंचिनोपल्ली, क्वेटा और शिलांग जैसे सुदूरवर्ती भागों सहित 65 औद्योगिक केंद्रों का निरीक्षण किया। 528 केंद्रों की जांच पड़ताल मौके पर की गई जिनमें बागान और खदानें सम्मिलित हैं। विभिन्न उद्योगों से संबंधित कम से कम 1,631 एककों का सर्वेक्षण किया गया। सैकड़ों प्रश्नों की प्रश्नावली औद्योगिक संस्थाओं, प्रांतीय तथा राज्य सरकारों, कर्मचारियों और नियोक्ताओं तथा कार्यकर्ताओं के संगठनों को भेजी गई। समिति द्वारा किस मात्रा में तथ्यपरक सामग्री का विश्लेषण किया गया यह इस तथ्य से विदित होता है कि केवल मजदूरी के आंकड़ों के संबंध में ही 34,080 फार्म प्राप्त हुए।
समिति ने ऐसे 16 पर्यवेक्षकों तथा 45 जांचकर्ताओं का एक कर्मचारीवर्ग नियुक्त किया जिन्हें तदर्थ सर्वेक्षणों के लिए भेजा गया। इन कर्मचारियों ने न केवल विभिन्न केंद्रों में मौके पर जाकर सूचना एकत्र की अपितु कुछ अन्य संभव स्रोतों से भी तथ्य एकत्र किए। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से नियोक्ताओं, कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों से अपनी जांच पड़ताल के समय संपर्क स्थापित किए।
सर्वेक्षण के लिए क्षेत्रवार प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रों का चयन किया ताकि देश के अलग-अलग भागों में एक ही उद्योग में लगे श्रमिकों की दशाओं के अंतर का पता चल सके। सामान्यतया किसी भी संस्थान का चयन उसके महत्व, आकार आदि के आधार पर किया गया और पता किया गया कि वह कानूनी विनियमों के अंतर्गत आती है या नहीं। मौजूदा श्रम कानून द्वारा किया गया संरक्षण, मजदूरी तथा श्रमिकों की आय कार्य करने की दशाएं, ऋण, आयु तथा मृत्यु दर के आंकड़े, कल्याण संबंधी कार्यकलाप और सामाजिक सुरक्षा कानून के बारे में पूछताछ की गई।