भारत की स्थिति
15
गांधी जी दिसम्बर, 1941 तक सर्वोच्च सेना-नायक बने रहे। कार्य समिति की बैठक दिसम्बर, 1941 में बारदौली में हुई जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर गांधी जी को अपदस्थ कर दिया गया। दिसम्बर, 1941 में जो घटना घटी उसकी प्रमुख विशेषता मेरी समझ में सभा के सदस्यों की जानकारी में नहीं है! बारदौली में गांधी जी और उनके उन अनुयायियों के बीच जो अहिंसा में विश्वास नहीं रखते थे बड़ी खींचातानी थी। यह मामला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की वार्धा बैठक में उठाया गया। भारत के सभी लोग, विशेष रूप से कार्य समिति के सदस्य, यह अपेक्षा रखते थे कि गांधी जी इस मामले पर कोई न कोई निर्णय करा लेंगे और या तो बारदौली में कार्य समिति द्वारा पारित प्रस्ताव रद्द हो जाएगा, और यदि ऐसा करना संभव न हुआ तो वह अपना त्यागपत्र दे देंगे। वार्धा में गांधी जी की जो सबसे हैरानी की बात थी वह यह थी कि जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के समक्ष उसके अनुमोदन के लिए प्रस्ताव लाया गया तब अहिंसा के पुजारी ने अपने अनुयायियों को यह हिदायत दी कि इस मामले पर मत विभाजन की नौबत नहीं आनी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने कार्य समिति के साथ सहयोग किया और इसके सर्वोच्च सेना नायक बने रहे। महोदय, यदि यह इस बात का साक्ष्य नहीं है कि कांग्रेस में हिंसा की भावना घर कर गई थी - जो ठीक कांग्रेस और गांधी जी के सामने हुआ तो मेरे विचार में इस मुद्दे पर इससे अच्छा साक्ष्य और क्या हो सकता है।
एक अन्य मुद्दा भी है जिसके बारे में मैं समझता हूं कि माननीय सदस्यों को जानकारी नहीं है और इसके बारे में मैं कुछ उल्लेख करना चाहूंगा। यह मात्र तथ्य ही नहीं है कि कांग्रेस कार्य समिति के लगभग सभी सदस्यों, निश्चय ही उनमें से अधिकांश का अहिंसा में विश्वास नहीं रह गया था। उनमें से बहुत से इस सिद्धांत से अलग हो गए थे, किन्तु यह दर्शाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है कि कांग्रेस के भीतर योजनाबद्ध तरीके से हिंसा का अभियान चल रहा था।
सरदार सन्त सिंहः जहां तक युद्ध का संबंध है ....................
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः कृपया टोका-टोकी न करें ............
सरदार सन्त सिंहः आप गलत बयानी कर रहे हैं।
कुछ माननीय सदस्यः यह बात ठीक नहीं, इसका कोई साक्ष्य नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं कोई असत्य बयान नहीं दे रहा हूं। मैं समझता हूं कि एक साक्ष्य है जिसकी चर्चा सदन में नहीं की गई और मैं उसका उल्लेख करना चाहता हूं।