3. भारत की स्थिति - Page 41

16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

देवली नजरबंदी कैम्प में, जहां श्री जयप्रकाश नारायण को रखा गया था, एक घटना घटी थी। सदन को संभवतः ज्ञात है कि कैम्प के अधीक्षक के हाथ कुछ ऐसे कागजात लगे जो कि श्री जयप्रकाश नारायण चोरी-छिपे अपनी पत्नी के पास कारागार से बाहर भेजना चाहते थे। यह घटना दिसम्बर, 1941 की है और कोई व्यक्ति जो यह जानना चाहता हो कि कांग्रेस के भीतर कार्य समिति में क्या कुछ चल रहा है तो मेरा निवेदन है कि वह उन दस्तावेजों पर पूरी तरह ध्यान दे। उस दस्तावेज से क्या प्रकट होता है? यह दस्तावेज यदि मैंने उसे ठीक से पढ़ा है, तो उससे चार या पांच मुद्दे सामने आते हैं। सर्वप्रथम मैं श्री जय प्रकाश नारायण के शब्दों का ही प्रयोग करता हूं - यह सत्याग्रह जो गांधी जी चला रहे हैं उसे अधिकांश कांग्रेस जनों ने मूर्खतापूर्ण कार्य माना है। इसमें कोई समझदारी नहीं है न ही इसका कोई अर्थ है। दूसरे, जय प्रकाश नारायण यह मानते हैं कि यदि कांग्रेस अपना लक्ष्य पूरा करना चाहती है तो इसे चाहिए कि नैतिक विजय प्राप्त करना बंद कर दे और राजनैतिक विजय प्राप्त करने का प्रयास करे। यह गांधी पर दूसरा प्रहार था। दूसरा तथ्य जो इस दस्तावेज से प्रकट होता है वह यह है कि भारत में कतिपय ऐसी पार्टियां अस्तित्व में हैं जो न केवल अहिंसा में अविश्वास करती है, बल्कि हिंसा के लिए दृढ़संकल्प है_ और उस दस्तावेज में जिन पार्टियों का हवाला दिया गया मेरी समझे में वे कहीं और नहीं कांगे्रेस के भीतर ही हैंः भारतीय कम्यूनस्टि पार्टी, बंगाल में क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी, कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी_ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन संगठन। श्री जय प्रकाश नारायण ने यह परियोजना बनाई थी कि संभवतः कम्यूनिस्ट पार्टी को छोड़कर इन सभी पार्टियों को एक संगठन में मिला दिया जाए जो एक गुप्त पार्टी हो, कांग्रेस के भीतर ही काम करती रहे और छुपकर काम करे और इसके लिए ठीक तकनीकी नाम दें तो यह भूमिगत रहे। श्री राय प्रकाश नारायण ने यह भी सुझाव दिया कि यह गुप्त पार्टी न केवल कांग्रेस के भीतर रहे बल्कि अपनी नीतियों को क्रियान्वित करने के लिए राजनैतिक डकैती भी डालकर धन एकत्र करे। यदि ये दो तथ्य जिनका मैंने हवाला दिया है सही विचार वाले लोगों का समाधान नहीं करते कि कांग्रेस केवल जबानी जमाखर्च के लिए अहिंसा के सिद्धांत की बात करती है तो मैं नहीं समझता कि इससे भी बड़ा कोई साक्ष्य हो सकता है जिससे सही व्यक्तियों का समाधान किया जा सके। मान्यवर, यह एक ऐसी स्थिति थी जिसे सरकार ने कार्यवाही करने से पूर्व ध्यान में रखा।

अब, मैं दूसरे बिंदु पर आता हूं जो मेरे भाषण का मुख्य विषय है। विपक्षी सदस्यों द्वारा यह कहा गया है कि यद्यपि किन्हीं परिस्थितियों में दमन को न्यायोचित ठहराया