20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परिवर्तित समय का ध्यान करें तो यह सदन रूग्णावस्था को प्राप्त हो चुका है।
सरदार संत सिंहः यह सदा से है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः इसका चुनाव तीन वर्षों के लिए हुआ था, पर यह लगभग नौ वर्षों से कार्यरत है। मैं नहीं कह सकता कि वर्तमान सदस्यों का किस सीमा तक अपने चुनाव क्षेत्र से इस सदन में प्रत्यक्ष या ताजा जन-समर्थन है। क्योंकि यह समयावसान के साथ पुराना हो गया है। इस बारे में मैं कुछ नहीं कहूंगा, किंतु अब आगे चलें और सदन के गठन की जांच करें।
माननीय अध्यक्ष (सर अब्दुर रहीम)ः माननीय सदस्य समय से अधिक बोल चुके हैं।
पं. लक्ष्मी कांत मैत्रा (प्रेसीडेंसी डिवीजन)ः गैर मुस्लिम ग्रामीण)ः जो कुछ हमारे माननीय दोस्त ने कहा उसका संबंध सदन के समक्ष लाए गए प्रस्ताव से नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर अम्बेडकरः मान्यवर, यदि आप समझते हैं मेरा समय समाप्त हो गया है ..............
माननीय अध्यक्ष (सर अब्दुर रहीम)ः समय सीमा सभी दलों की सहमति से नियत की गई थी और इसे मुझे लागू करना है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः तब मैं अपना भाषण समाप्त करता हूं। आप जिस नजरिए से चाहें, विधानमंडल की परीक्षा करें। इसे जनादेश के नजरिए से देखें, या इसके गठन की दृष्टि से, इसके प्रतिनिधि-स्वरूप की नजर से जांचें चाहे उन मतदाताओं के नजरिए से जिनका प्रतिनिधित्व यह करता है। मुझे इस संबंध में कोई संदेह नहीं है कि यह सदन इतना पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करता कि वह राष्ट ्र ीय सरकार को वीटो सौंप दे।
श्री जमनादास एम. मेहताः आप ने सत्र क्यों बुलाया? (कुछ और टोका टोकी हुई)।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः इसलिए मुद्दा यह है कि या तो आप इस तथ्य को स्वीकार करें कि यह सदन इतना प्रतिनिधित्व नहीं करता कि इसमें वीटो अधिरोपित किया जाए, अथवा आप विचार करें कि युद्ध की अवधि के दौरान क्या हमारे लिए संभव है विधानमंडल को हम ऐसा नया स्वरूप दें कि इसमें पर्याप्त संख्या