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भारत की स्थिति

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में, हिंदू, मुसलमान, दलित वर्ग और ऐसे तत्व शामिल हों जो देश के राष्ट्रीय स्वरूप के लिए आवश्यक है। इसलिए मेरा यह निवेदन है कि राष्ट्रीय सरकार की जो मांग की गई है वह निश्चित रूप से दिगभ्रमित विचारों का परिणाम है। क्या अधिकांश की इच्छा उसे छोड़ने की है मैं जिसे महत्वपूर्ण प्रश्न समझता हूं अर्थात जातीय समझौता, क्योंकि जब तक जातीय-समझौता नहीं हो जाता तब तक सदन को ऐसा स्वरूप देना संभव नहीं होगा जिसमें वह कार्यपालिका के ऊ पर वीटो-शक्ति प्राप्त कर सके। इसे नया स्वरूप नए संविधान के जरिए ही दिया जा सकता है। मान्यवर, मैं इस विषय पर और नहीं बोल सकता क्योंकि मेरा समय समाप्त हो गया है और मैं अपना स्थान ग्रहण करता हूं।