4. भारतीय भू-सर्वेक्षण विभाग की उपयोगिता शाखा की सलाहकार समिति के लिए एक सदस्य का निर्वाचन - Page 51

26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बनाया गया है जो वाणिज्य विभाग का प्रतिनिधित्व करेगा। इससे सदन को यह पता चलेगा कि समिति का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञों को लाने का है जो उद्योगपतियों और व्यवसाय के प्रतिनिधियों को बता सकें कि किन खनिजों का उन्हें पता लगा है और व्यवसाय एवं उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि उन्हें बताएंगे कि वाणिज्यिक रूप से खानों का कैसे विकास होगा।

मान्यवर, अब सदन यदि यह बात ध्यान में रखे कि समिति का यही मुख्य उद्देश्य है तो मैं नहीं समझता कि इसमें देश भर की सामान्य राय को और अधिक स्थान देने की गुंजाइश है।

डॉ. पी. एन. बनर्जी (कलकत्ता उप-नगरीय गैर-मुस्लिम शहरी)ः सामान्य जनता की प्रतिनिधि।

माननीय डॉ. बी. आर अम्बेडकरः हां, सामान्य जनता के प्रतिनिधि। दूसरा तर्क मैं यह देना चाहता हूं कि वस्तुतः यह समिति पहले ही एक बड़ी समिति है। अब जैसी योजना बनी है, इसमें 14 सदस्य हैं। यदि मैं संशोधन स्वीकार कर लेता हूं जिसमें चार सदस्य मांगे गए हैं तो संख्या होगी 18 सदस्यों की। और यदि मैं इस सदन से चार सदस्य जोड़ देता हूं तो अपर हाउस भी कम से कम तीन सदस्यों की मांग करेगा। इसका तात्पर्य यह होगा कि समिति में 21 सदस्य होंगे जिनके बारे में निस्संदेह सदन भी सहमत होगा कि वह उस कार्य के लिए उपयोगी नहीं होगी जो वस्तुतः उसे करना है।

अगला मुद्दा जिसकी ओर मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं वह यह है कि समिति के गठन में श्रम सदस्य को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वह चार सदस्य नामनिर्दिष्ट कर सकता है और उस नामनिर्देशन की शक्ति की बाबत कोई लक्ष्मण रेखा खींचे बगैर मैं समझता हूं कि नामनिर्देशन के माध्यम से इस सदन के एक सदस्य को स्थान दिया जा सकता है। इसलिए जो विचार मैंने सदन के समक्ष रखा है उसे ध्यान में रखते हुए मुझे यह कहते हुए खेद है कि मैं इन संशोधनों को स्वीकार नहीं कर सकता।