30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मित्र राष्ट्रों के लिए लड़ने के लिए अपना निश्चय दृढ़ कर रहा है जिससे नाजीवाद को नष्ट किया जा सके। उसने वही निर्णय लिया है जो कोई समझदार व्यक्ति ले सकता है। फिर भी कुछ ऐसे लोग हैं जो इस विचार को नहीं मानते हैं।
कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके विचार में नाजी विजय और आने वाली नई नाजी व्यवस्था से कोई अंतर नहीं पड़ता। सौभाग्य से देश में ऐसे लोग अधिक नहीं हैं। जो ऐसे विचार रखतो हैं वे स्वयं बहुत गंभीर नहीं है। उनकी बात कोई भी गंभीरता से नहीं लेता। वे लोग राजनैतिक लोग हैं, उन्हें तब तक संतोष नहीं होगा जब तक उन्हें अपने विचार थोपने न दिए जाएं। और उनका नारा है ‘‘सब कुछ या कुछ नहीं।’’
कुछ लोग शांतिवादी हैं जिनका तर्क है कि सभी युद्ध गलत है। इनकी दलील है कि संसार में युद्ध के कारण ही कठिनाइयां पैदा हुई हैं और इसके कारण ही वह मानव सभ्यता विकृत हो गई है जिसे मानव ने बड़ी साधना से बनाया था। यह सच है। किन्तु इस सबके बावजूद, श्रमिक शांतिवाद को जीवन का आदर्श मानना अस्वीकृत कर देता है। युद्ध से यह कह कर नहीं बचा जा सकता है कि हमला होने पर भी हम लड़ाई नहीं करेंगे। हिंसक शक्तियों के समक्ष घुटने टेक कर प्राप्त की गई शांति को शांति नहीं कहा जा सकता। यह एक प्रकार की आत्महत्या है जिसके लिए कोई औचित्य खोजना कठिन है। यह तो मानव जीवन के मूल्यों का बर्बर शक्तियों के समक्ष समर्पण है।
श्रमिकों का युद्ध को समाप्त करने का मार्ग समर्पण नहीं है। श्रमिकों की दृष्टि में केवल दो ही बातों से युद्ध समाप्त हो सकता है। एक है युद्ध को जीतना और दूसरा है न्यायोचित शांति की स्थापना। श्रमिक के नजरिए से दोनों बातें महत्वपूर्ण हैं। श्रमिकों की धारणा है कि युद्ध मानव की युद्ध पिपासा में निहित नहीं है। युद्ध का मूल उद्गम उस मिथ्या शांति में है जो विजेता प्रायः पराजित पर थोपता है। श्रमिक के अनुसार शांतिवादी का यह कर्तव्य नहीं है कि वह आक्रोश व्यक्त करे किन्तु युद्ध छिड़ जाने पर लडने से इंकार कर दे। श्रमिक का विश्वास है कि शांतिवादी का कर्तव्य है कि वह युद्ध छिड़ने पर भी और जब शांति की शर्तें रखी जा रही हों उस समय भी सक्रिय और सतर्क रहे। शांतिवादी व्यक्ति ठीक समय पर सही निर्णय लेने में चूक जाता है। वह युद्ध के समय युद्ध के विरुद्ध सक्रिय होता है। जब युद्ध समाप्त हो जाता है, शांति आरंभ होती है, तब वह निष्क्रिय और उदासीन हो जाता है। इस प्रकार शांतिवादी युद्ध और शांति दोनों में हारता है। यदि श्रमिक युद्ध में लड़ने का निर्णय लेता है तो इसी कारण कि श्रमिक युद्ध समाप्त करने के लिए शांतिवाद का आश्रय नहीं लेता।