5. भारतीय-श्रमिक युद्ध जीतने के लिए क्यों दृढ़ संकल्प हैं - Page 59

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इन तथ्यों की दृष्टि में श्रमिक वर्ग युद्ध और उसके परिणामों के बारे में उदासीन नहीं हो सकता। श्रमिक को पता है कि भविष्य में नई व्यवस्था को स्थापित करने के प्रयास को किस प्रकार बार-बार विफल किया गया है। ऐसा इसलिए हुआ कि जब प्रजातंत्र अस्तित्व में आया तो उसे अनुदारदली हाथों में सौंप दिया गया। यदि अब दुनिया के लोग ध्यान रखें कि इस गलती को भविष्य में दोहराया नहीं जाएगा तो श्रमिक विश्वास रखेगा कि इस युद्ध को लड़ने और नई व्यवस्था स्थापित करने से विश्व को प्रजातंत्र के विकास के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

सही नेतृत्व

देश को नेतृत्व चाहिए और प्रश्न यह है कि नेतृत्व कौन देगा। मैं यह कहने का साहस कर सकता हूं कि श्रमिक देश को वह नेतृत्व दे सकता है जिसकी उसे आवश्यकता है। अन्य बातों के अतिरिक्त, सही नेतृत्व के लिए आदर्श और स्वतंत्र चिंतन की आवश्यकता होती है। अभिजात वर्ग के लिए आदर्शवाद संभव है, किन्तु वहां स्वतंत्र चिंतन संभव नहीं। श्रमिक के लिए आदर्शवाद और स्वतंत्र चिंतन दोनों ही संभव हैं। किन्तु मध्यम वर्ग के लिए न तो आदर्शवाद संभव है और न ही स्वतंत्र चिंतन। मध्यम वर्ग में अभिजात की उदारता नहीं होती जो आदर्श के स्वागत और पोषण के लिए आवश्यक है। इसमें नई व्यवस्था की भूख निहित नहीं है जिस पर श्रमिक वर्ग की आशाएं टिकी है। इसलिए अतीत के उन सुलझे और सुरक्षित मार्गों पर लौटने में श्रमिक का योगदान स्पष्ट है जिसके लिए भारतीय अपने राजनैतिक लक्ष्य पर पहुंचने का प्रयास करते रहे हैं। भारत और भारतीयों के लिए श्रमिकों का नेतृत्व युद्ध में शामिल होने और एकजुट रहने में है। विजय का परिणाम होगा स्वाधीनता और नई सामाजिक व्यवस्था। ऐसी विजय के लिए सबको मिल कर लड़ना चाहिए। तब ही विजय का फल सबके हिस्से में आएगा और कोई ऐसा नहीं रहेगा जिसे एकजुट भारत में अधिकारों से वंचित किया जा सके।