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ऽकागज नियंत्रण आदेश
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः मुझे सचमुच बड़ी प्रसन्नता है कि माननीय बाजोरिया ने यह स्थगन रखा है जिससे सरकार सदन के समक्ष देश में कागज की स्थिति के बारे में तथ्य रख सकेगी। मान्यवर, सदन में जो भाषण दिए गए उनमें सरकार के संबंध में कुछ बहुत कठोर बातें कही गई। इस देश की शिक्षा संस्थाओं के संदर्भ में सरकार पर कठोर एवं स्वार्थी होने और पाषाण हृदय होने के आरोप लगाए गए। मैं सदन के समक्ष कुछ ऐसे तथ्य रखना चाहता हूं जिनके कारण सरकार को यह आदेश जारी करना पड़ा और बताना चाहूता कि स्थिति से निपटने के लिए तथा भविष्य के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
महोदय, सरकार द्वारा जो आदेश जारी किया गया है, वह किस प्रकार का है इसके बारे में गलतफहमी है। एक के बाद दूसरे सदस्य ने सदन में खड़े होकर सुझाव दिया है कि सरकार द्वारा पारित आदेश के अनुसार अपने उत्पादन का 90 प्रतिशत सरकार स्वयं लेना चाहती है। मैं सदन को बताना चाहता हूं कि यह पूर्ण रूप से गलतफहमी है। कागज नियंत्रक द्वारा जारी आदेश कोई हथियाने का आदेश नहीं है। यह ऐसा आदेश है जिसमें कहा गया है कि कागज निर्माता अपने उत्पादन का 90 प्रतिशत सरकार को सौंपने के लिए बाध्य होंगे। इस आदेश को नियंत्रण आदेश कह सकते हैं और मैं सदन को बताना चाहता हूं कि जो अंतर मैं स्पष्ट कर रहा हूं वही वास्तविक अंतर है। यह आदेश कागज-निर्माताओं को यही बताता है कि वे अपने उत्पादन का 10 प्रतिशत से अधिक जनता को नहीं बेच सकते।
इसमें यह नहीं कहा गया है कि वे 90 प्रतिशत कागज सरकार को सौंप देंगे। मैं समझता हूं कि यह एक मूलभूत और वास्तविक अंतर है जिसे सदन को ध्यान में रखना चाहिए।
ऽ विधान सभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) खंड 1, फरवरी 11, 1943, पृष्ठ 128-31