36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पं. लक्ष्मीकांत मैत्रा (प्रेसीडेंसी डिवीजन)ः गैर-मुस्लिम ग्रामीण)ः इस अंतर का वास्तविकता पर क्या प्रभाव पड़ा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः सरकार 10 प्रतिशत से अधिक कागज की निकासी कर सकती है।
बापुर बैजनाथ बाजोरियाः कैसे?
डॉ. पी. एन. बनर्जीः जब सरकार को अकल आएगी?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः आदेश यही है। मैं आदेश की व्याख्या नहीं कर रहा हूं। मैं आदेश की भाषा को स्पष्ट कर रहा हूं। (कतिपय सदस्यों के बोलने से व्यवधान हुआ)
अध्यक्ष महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः शांत रहिए। शांति रखिए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः दूसरा मुद्दा जिसे सदन को ध्यान में रखना है, वह यह है कि आदेश की तामील कागज की मिलों को की गई है। इसकी तामील आढ़तियों को नहीं की गई है जिनके गोदामों में पहले से ही भारी मात्रा में कागज का भंडार है। जनता अपनी आवश्यकता की पूर्ति स्टॉक में उपलब्ध कागज से कर सकती है क्योंकि आदेश जारी हाने से पूर्व कागज की जमाखोरी कर ली गई थी। इस आदेश की बाबत तीसरी बात जिसकी मैं सदन को याद दिलाता हूं वह यह है कि आदेश जिस रूप में बनाया गया है उससे कागज नियंत्रक मिलों को 10 प्रतिशत से अधिक बेचने की अनुमति दे सकता है। कागज नियंत्रण की ओर से इस पर कोई बंधन या रूकावट नहीं है। जो आदेश 5 नवम्बर को पारित हुआ है उसमें किसी बात के होते हुए भी यदि कागज नियंत्रक की उसके लिए 10 प्रतिशत से अधिक कागज जनता के उपयोग के लिए देना संभव है तो वह 10 प्रतिशत से अधिक कागज जनता के लिए उपलब्ध कराएगा। उसे ऐसा करने से छूट अभी भी है। सरकार द्वारा जारी आदेश में क्या कुछ अंतर्निहित है इसे नष्ट करने के पश्चात अब मैं सदन को उन बातों की जानकारी दूंगा कि वह कौन सी तात्कालिक परिस्थितियां थीं जिनमें सरकार यह आदेश जा करने को मजबूर हुई।
संक्षेप में, तथ्य इस प्रकार हैं। अप्रैल से सितम्बर तक के छह महीनों में हमारी कागज की आवश्यकता हमारे केंद्रीय लेखन सामग्री कार्यालय के अनुसार 34,000 टन थी। यह ज्ञात हुआ कि मिलों ने पहले ही सरकार को 16,000 टन कागज केंद्रीय लेखन सामग्री कार्यालय की ओर से उपलब्ध करा दिया है। सदन को यह बात ध्यान में रखनी होगी कि हमने कागज मिलों से 25,900 टन कागज की आपूर्ति कराने का करार किया था। यदि सदन हिसाब लगाए तो पता चलेगा कि संविदा के अधीन हमें