कागज नियंत्रण आदेश
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प्रसन्नता होगी कि प्रांतों और राज्यों के खर्चों में कटौती करने में 950 टन की बचत हुई। इसके अतिरिक्त 11,900 टन विभिन्न विभागों के प्राक्कलनों के पुनरीक्षण से प्राप्त हुआ और कुल योग 12,850 टन हुआ। अब इस आंकड़े का मिलान भारत में उपयोग किए जाने वाले कागज के साथ करते हैं। इस संबंध में ठीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, न ही उपलब्ध हो सकता है। किन्तु सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में कागज की वार्षिक खपत लगभग एक लाख टन है। छह मास के लिए यह 50,000 टन बनती है, और सदन को याद होगा कि नियंत्रक मुद्रण के आदेश से इसका 10 प्रतिशत जनता के लिए छोड़ा गया है। तदनुसार जनता को 5000 टन प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त, 12,850 टन कागज जो बचाया जाएगा या जो कटौती के जरिए बचेगा वह मिलाकर कुल 17,850 टन कागज जनता के लिए दिया जा सकेगा। सदन देखेगा कि यह उस मात्र का 33 प्रतिशत बनता है जिसे शांति के समय जनता उपयोग करती है ...................
माननीय अध्यक्ष ( सर अब्दुर रहीम)ः माननीय सदस्य का समय पूरा हो गया। कोई विकल्प नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं अन्य उपायों का जिक्र करने जा रहा था जिसे कागज की बर्बादी रोकने के लिए अमल में लाया जा रहा है। चूंकि मेरा समय समाप्त हो गया है अतः मैं विस्तार में नहीं जाऊंगा। यदि सदन का विचार हो तो मैं उसे प्रेस को दे दूंगा।
अगली बात जो मैं माननीय सदन को बताना चाहता हूं वह यह है कि हम अगले वर्ष के लिए क्या करना चाहते हैं। अगले वर्ष का प्राक्कलन है 70,000 टन का_ उसमें हमने यह किया है कि प्रत्येक विभाग के लिए कागज का कोटा निश्चित कर दिया है। उदाहरण के लिए नियंत्रक आकाशवाणी को बता दिया गया है कि उन्हें 260 टन से अधिक कागज नहीं मिलेगा। प्रति प्रचार निदेशालय को मात्र 100 टन कागज दिया जाएगा_ राष्ट्रीय युद्ध मोर्चा को 350 टन_ लोक सूचना विभाग को 300 टन। बहुत सी बातें हैं जो यदि समय होता, मैं सदन के समक्ष रखता। मैं सदन से केवल यह निवेदन करना चाहता हूं कि यह कहना कि सरकार निरंकुश है उचित नहीं है। मैं इस बात से इन्कार नहीं करता कि फिर भी मितव्ययिता के लिए गुंजाइश है और मैं उन सदस्यों का आभारी हूं जिन्होंने सुझाव दिया कि आर्थिक स्थिति कैसे प्रभावित होगी और निश्चित रूप से इन सुझावों को मैं समुचित प्राधिकारियों तक पहुंचा दूंगा जिससे कार्यवाही की जा सके। मुझे आशा है कि माननीय सदस्यों का समाधान हो जाएगा कि सरकार ऐसे कदम उठा रही है जो इस विषय में वह उठा सकती है।