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ऽकामगारों को अपर्याप्त महंगाई भत्ता
दिए जाने के संबंध में घोषणा
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः (श्रम सदस्य)ःश्रीमन्, यदि मैं ठीक समझ सका हूं तो श्री मेहता द्वारा रखे गए प्रस्ताव से दो मुद्दे सामने आते हैं। पहला मुद्दा तो यह है कि जिस समय महंगाई भत्ते का प्रश्न उठाया गया, सरकार ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों से परामर्श करने में विफल रही। दूसरा मुद्दा जो प्रस्ताव में उठाया गया है, यह है कि 21 जनवरी को जिस महंगाई भत्ते की घोषणा की गई वह बहुत कम और अपर्याप्त था। मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि यद्यपि मुझे यह प्रस्ताव लाने के लिए श्री मेहता से हमदर्दी है फिर भी मैं यह कहने के लिए बाध्य हूं कि यह प्रस्ताव गलतफहमी पर आधारित है।
श्रीमन, मैं प्रथम प्रश्न को लेता हूं कि भारत सरकार द्वारा घोषित मंहगाई भत्ता कम और अपर्याप्त है। भत्ते की कमी के बारे में मुझे कहना पड़ रहा है कि सदन को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सरकार अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है और यह नहीं कहा जा सकता है कि 23 फरवरी को अधिसूचना द्वारा जिस रकम की घोषणा की गई है उसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता या से बढ़ाया नहीं जा सकता।
पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा (प्रेसीडेंसी डिवीजनः गैर-मुस्लिम ग्रामीण)ः क्या यह प्रयोग के लिए है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः हो सकता है। कहा गया कि इस राशि द्वारा पर्याप्त मंहगाई भत्ता नहीं दिया गया है। किन्तु कह चुका हूं कि इसके बारे में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। विषय अभी भी सक्रिय है और अभी सरकार के समक्ष इस मामले पर विचार किया जा रहा है कि किस रूप में मंहगाई भत्ता दिया जाए। इसे नकदी भत्ते के रूप में दिया जाएगा या खाद्य पदार्थ के रूप में उपलब्ध कराया जाए।
ऽ विधान सभा वादविवाद (केन्द्रीय) खंड 1, 12 फरवरी, 1943, पृष्ठ 197-99