कामगारों को पर्याप्त मंहगाई भत्ता दिये जाने के संबंध में घोषणा
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यह ऐसा प्रश्न है जिसे सरकार को कोई निश्चित सीमा नियत करने से पूर्व सुलझाना है। इसलिए इस मुद्दे पर मेरा निवेदन है कि सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है जिसे सुधार्य, परिवर्तनीय या असंशोधनीय माना जा सके।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्राः क्या अच्छे आचरण के लिए कोई भत्ता है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडरः मैं समझता हूं डाक विभाग में यह सुविधा दी गई है। जहां तक कम या अपर्याप्त होने का प्रश्न है, यह मामला अभी भी खुला है और उपयुक्त समय पर इस पर विचार किया जा सकता है।
अब दूसरा आरोप जिसमें कहा गया है कि सरकार ने मजदूर संघों के नेताओं से कोई बातचीत नहीं की, मेरी समझ में पहली बात तो यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि श्रमिक वर्ग से संपर्क करने में कुछ कठिनाइयां हैं। कठिनाई यह है कि जैसा कि हमारे माननीय मित्र जमनादास मेहता जी जानते हैं, जहां तक रेलवे का संबंध है वहां मजूदर संघ हैं जो एक महासंघ के रूप में संगठित हैं और रेलवे के कामगारों से संपर्क करना और जरूरत पड़ने पर उनकी राय जानना सरकार के लिए आसान किया गया है। मैं समझता हूं कि श्री जमनादास मेहता को पता होगा कि सरकार ऐसा करती रही है। वस्तुतः परंपरा बन चुकी है और बिना व्यवधान के इस पर अमल किया गया है और समान हित की समस्याओं पर विचार करने के लिए रेलवे बोर्ड और रेलवेमैन्स फेडरेशन साल में दो बैठकें कराते हैं।
फिर केंद्रीय सरकार के डाक-तार विभाग के कर्मचारी हैं। जहां तक मैं समझता हूं, डाक-तार विभाग के कार्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाली बारह यूनियनें हैं, जिनमें से चार यूनियनें उच्च अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करती हैं और आठ कामगारों का प्रतिनिधित्व करती है। दुर्भाग्यवश, कोई एक निकाय या डाक-तार विभाग के विभिन्न कर्मचारी संघों का कोई महासंघ नहीं है इसलिए ऐसा संपर्क करना संभव नहीं हो सकता जो कि रेलवे बोर्ड में संभव है क्योंकि रेलकर्मियों का एक महासंघ है। किन्तु मैं इस तथ्य का उल्लेख करना चाहता हूं कि इस कठिनाई के बावजूद, सरकार ने कार्रवाई करने से पूर्व डाक-तार कर्मचारियों से संपर्क करने का प्रयास किया थ। मैं सदन के समक्ष टेलीग्राफ रिव्यू पत्रिका के जनवरी, 1943 के अंत से एक पैरा पढ़ना चाहता हूं जिसमें इस बात का उल्लेख है कि डाक-तार विभाग ने अपने कर्मचारियों से संपर्क करने का प्रयास किया था। रिव्यू में कहा गया हैः
‘‘अपने कलकत्ता दौरे के दौरान महानिदेशक ने सभी मान्यताप्राप्त सेवा-संगठनों
के प्रतिनिधियों को बुलाया और उनके साथ 10 दिसम्बर, 1942 को मंहगाई
भत्ते के प्रश्न पर संयुक्त सम्मेलन किया। सम्मेलन में प्रतिनिधिगण इस प्रश्न पर