7. कामगारों को अपर्याप्त मंहगाई भत्ता दिए जाने के संबंध में घोषणा - Page 67

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संयुक्त रूप से अपना पक्ष नहीं रख सके। परिणामस्वरूप, पोस्टल क्लब भवन,

कलकत्ता में तारापद हाल में 12 दिसम्बर, 1942 का उनकी बैठक हुई और

परस्पर सहमति से एक नई मंहगाई भत्ता योजना तैयार की गई जो इस अंक में

अन्यथा प्रकाशित की गई है।’’

श्री जमनादास एम. मेहताः उनकी योजना में क्या कहा गया है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः वे महानिदेशक से दोबारा मिले। प्रतिनिधिगण 18 दिसम्बर, 1942 को महानिदेशक से मिले और अपनी योजना उन्हें सौंप दी।

श्री जमनादास एम. मेहताः उन्होंने क्या मांग रखी हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः यह बहुत लंबी कहानी है। खेद है कि मुझे इतना समय नहीं दिया गया कि मैं इसे पूरा पढ़ सकूं। यदि मेरे माननीय मित्र चाहें तो उनके अवलोकन के लिए मैं उन्हें इसे दे सकता हूं। मैं यह बताना चाहता हूं कि जहां तक डाक-तार विभाग के कर्मचायिं का संबंध है, यह नहीं कहा जा सकता कि सरकार और संबद्ध कर्मचारियों के बीच मंहगाई भत्ता घोषित किए जाने से पूर्व परामर्श नहीं हुआ था।

महोदय, इसके बाद बचते हैं केंद्रीय सरकार के लिपिक वर्ग के कर्मचारी। कर्मचारियों के इस समूह की कोई यूनियन नहीं है। और चूंकि इनकी कोई यूनियन नहीं है, अतः इनका कोई महासंघ भी नहीं है। कुछ संगठन मात्र हैं। सर्वप्रथम है इम्पीरियल सचिवालय संगठन, दूसरा है दफतरी एवं रिकार्ड स्टोर संगठन और तीसरा है सामान्य मुख्यालय संगठन। सदन को यह जानकर प्रसन्नता होगी कि उनसे परामर्श में चूक होने की बात ही नहीं। उन्होंने अपना प्रतिनिधिमंडल केंंद्रीय सरकार के पास भेजा और इस घोषणा से पूर्व उनको माननीय गृह सदस्य और वित्त सदस्य से साक्षात्कार का अवसर दिया गया। मेरी समझ में मैंने जो कुछ कहा न्यायोचित है कि जिन आरोपों पर श्री जमनादास मेहता का प्रस्ताव आधारित है वे सही नहीं थे। सरकार ने जो बात कही, सदैव उस पर अमल किया है अर्थात् जहां तक संभव हो सका है, उसने कर्मचारियों से परामर्श किया है।